पटना, 23 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा में बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी।
रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय व्यवस्था को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। कैग ने उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी), राजकोषीय घाटे और बजटीय प्रबंधन में खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में 70,876.61 करोड़ रुपये से संबंधित 49,649 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे, जबकि वर्ष 2025 में 93,132.75 करोड़ रुपये से संबंधित 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित पाए गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 26.15 प्रतिशत की वृद्धि है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपयोगिता प्रमाण पत्रों का लंबित रहना निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है और इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार का कुल बजट बढ़कर 3,64,518.87 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन राज्य सरकार 2,87,178.49 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी।
इस प्रकार 77,340.38 करोड़ रुपये, यानी कुल बजट का लगभग 27.22 प्रतिशत, व्यय नहीं हो सका। कैग के अनुसार, यह स्थिति बजट अनुमान और वास्तविक आवश्यकताओं के सटीक आकलन में कमी को दर्शाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में राज्य का बजट 2,45,522.62 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3,64,518.87 करोड़ रुपये हो गया। इसके बावजूद बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो सका, जिससे बजटीय प्रबंधन की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।
कैग की रिपोर्ट में बिहार की वित्तीय व्यवस्था पर कई टिप्पणियां, यूसी और विपत्र लंबित रहने पर जताई चिंता यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 10.89 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विपत्रों का लंबे समय तक समायोजित नहीं होना सरकारी धन के दुरुपयोग और राजकोष को होने वाले संभावित नुकसान का संकेत देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बिहार का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4.16 प्रतिशत रहा, जो निर्धारित 3.5 प्रतिशत की सीमा से अधिक है। हालांकि, राज्य की कुल बकाया देनदारियां जीएसडीपी के 37.72 प्रतिशत पर रहीं, जो निर्धारित 39.90 प्रतिशत की सीमा के भीतर हैं। कैग ने इसे राहत का विषय माना, लेकिन बढ़ते राजकोषीय घाटे पर चिंता व्यक्त की।
कैग के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 48 प्रतिशत हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी पर खर्च हुआ। इसके कारण विकास योजनाओं और पूंजीगत व्यय के लिए केवल 52 प्रतिशत संसाधन उपलब्ध रह गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।
भाषा कैलाश संतोष
संतोष