ओबीसी, ईबीसी की हिस्सेदारी को दबाने के लिए केंद्र जातीय जनगणना में देरी कर रहा: ठाकरे

ओबीसी, ईबीसी की हिस्सेदारी को दबाने के लिए केंद्र जातीय जनगणना में देरी कर रहा: ठाकरे

ओबीसी, ईबीसी की हिस्सेदारी को दबाने के लिए केंद्र जातीय जनगणना में देरी कर रहा: ठाकरे
Modified Date: September 5, 2026 / 08:18 pm IST
Published Date: September 5, 2026 8:18 pm IST

पटना, पांच सितंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माणिकराव ठाकरे ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार जातीय जनगणना में जानबूझकर देरी कर रही है और इसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की वास्तविक हिस्सेदारी सामने नहीं आ सके।

ठाकरे ने यहां बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि जनगणना प्रश्नावली में एक स्पष्ट ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी और वैज्ञानिक जाति सूची का अभाव जैसी विसंगतियां इस पूरी कवायद को प्रभावित कर सकती हैं।

गोवा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के कांग्रेस प्रभारी ठाकरे ने केंद्र से मांग की कि राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करके नयी प्रश्नावली तैयार की जाए। उन्होंने बिहार और तेलंगाना में अपनाए गए जातीय सर्वेक्षण के मॉडल के कुछ पहलुओं को इसमें शामिल करने की मांग भी की।

उन्होंने कहा, ‘‘जातीय जनगणना से विभिन्न समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े मिलेंगे। इससे लक्षित कल्याणकारी नीतियां बनाने और आरक्षण संबंधी प्रावधानों की समीक्षा में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ओबीसी और ईबीसी की वास्तविक हिस्सेदारी को दबाने के लिए जानबूझकर जातीय जनगणना में देरी कर रही है और इसे कमजोर कर रही है।’’

ठाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिहार के 65 प्रतिशत आरक्षण कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बिहार की भाजपा नीत सरकार पर भी जातीय सर्वेक्षण की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया।

बिहार सरकार ने 2023 में राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में वंचित जातियों के लिए आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से इस प्रावधान को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मंजूरी मांगी थी। नौवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के ऐसे कानूनों की सूची है जिन्हें आम तौर पर न्यायिक चुनौती से संरक्षण प्राप्त होता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र के जातीय जनगणना कराने के फैसले का समर्थन करती है, लेकिन इसके पूरा होने की स्पष्ट समयसीमा चाहती है। उन्होंने निजी शैक्षणिक संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की मांग की।

ठाकरे ने कहा कि जातीय जनगणना केवल समुदायों की संख्या गिनने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें देश के संस्थानों और सत्ता के ढांचे में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व का भी आकलन किया जाना चाहिए।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी और बिहार के शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।

भाषा अमित रंजन

रंजन


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