गणेश शंकर विद्यार्थी ने भाजपा-आरएसएस की ‘‘खतरनाक विचारधारा’’ के खिलाफ लड़ाई लड़ी: धवले

गणेश शंकर विद्यार्थी ने भाजपा-आरएसएस की ‘‘खतरनाक विचारधारा’’ के खिलाफ लड़ाई लड़ी: धवले

गणेश शंकर विद्यार्थी ने भाजपा-आरएसएस की ‘‘खतरनाक विचारधारा’’ के खिलाफ लड़ाई लड़ी: धवले
Modified Date: September 1, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: September 1, 2026 8:05 pm IST

पटना, एक सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो के सदस्य अशोक धवले ने मंगलवार को कहा कि पार्टी के दिवंगत नेता और स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी ने भाजपा-आरएसएस की ‘‘खतरनाक विचारधारा’’ के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

वह विद्यार्थी की 102वीं जयंती के अवसर पर उनकी आत्मकथा ‘‘मार्क्सवाद : मेरा संघर्ष पथ’’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

पुस्तक की संपादक और विद्यार्थी की बेटी मृणालिनी भी इस अवसर पर मौजूद थीं।

विद्यार्थी का जन्म एक सितंबर 1924 को बिहार के नवादा जिले में हुआ था। वह प्रमुख वामपंथी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और विधायक थे। वह कई बार बिहार विधानसभा और विधान परिषद सदस्य रहे। 2021 में 97 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर शरीक हुए वरिष्ठ वामपंथी नेता धवले ने कहा, ‘‘विद्यार्थी जी ने बढ़ते सांप्रदायिकता और जातिवाद के खतरे के खिलाफ चेतावनी दी थी। उन्होंने शुरुआती दौर में ही आरएसएस और भाजपा से जुड़े वैचारिक खतरों को पहचान लिया था।’’

माकपा नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस गठजोड़ की विचारधारा ‘‘मनुस्मृति में निहित’’ थी, जिसने ‘‘जातिगत ऊंच-नीच और महिलाओं को दबाने की व्यवस्था को मजबूत किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विद्यार्थी ने इन पिछड़ी ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी और भूमि अधिकार, उचित मजदूरी, सार्वजनिक शिक्षा तथा युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों और अन्य वंचित वर्गों के लिए रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार उठाए।’’

भाषा जोहेब रंजन

रंजन


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