अर्जुन वृक्ष आधारित हर्बल उद्योग को बढ़ावा देने पर सरकार गंभीर : मंगल पांडेय

अर्जुन वृक्ष आधारित हर्बल उद्योग को बढ़ावा देने पर सरकार गंभीर : मंगल पांडेय

अर्जुन वृक्ष आधारित हर्बल उद्योग को बढ़ावा देने पर सरकार गंभीर : मंगल पांडेय
Modified Date: February 20, 2026 / 02:38 pm IST
Published Date: February 20, 2026 2:38 pm IST

पटना, 20 फरवरी (भाषा) बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि अर्जुन (टर्मिनलिया अर्जुन) एक महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष है, जिसकी छाल का आयुर्वेदिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में, विशेषकर हृदय रोगों के उपचार में व्यापक उपयोग होता है।

पांडेय ने कहा कि उत्तर बिहार में इसकी उपलब्धता राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक एवं औषधीय संसाधन है।

मंत्री ने बताया कि बिहार राज्य औषधीय पादप बोर्ड राज्य में औषधीय पादपों के संरक्षण, संवर्धन, वैज्ञानिक कटाई (सस्टेनेबल हार्वेस्टिंग), मूल्य संवर्धन तथा विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यकता अनुसार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, कृषि विभाग तथा उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवहारिक एवं विधिसम्मत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य में हर्बल मेडिसिन क्षेत्र को सुदृढ़ किया जा सके।

मंत्री सदन में अलीनगर की विधायक मैथिली ठाकुर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार का पक्ष रख रहे थे।

ठाकुर ने अपने प्रस्ताव में उत्तर बिहार में अर्जुन (टर्मिनलिया अर्जुन) वृक्ष की प्रचूरता का उल्लेख करते हुए इसे राज्य की बड़ी आर्थिक एवं आयुर्वेदिक संपत्ति बताया और इसके सुनियोजित दोहन एवं प्रसंस्करण के लिए सरकारी पहल की मांग की।

उन्होंने कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों, खासकर उत्तर बिहार तथा अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में अर्जुन वृक्ष की पर्याप्त उपलब्धता है।

विधायक ने सुझाव दिया कि अर्जुन छाल को कच्चे माल के रूप में अन्य राज्यों में भेजने के बजाय जिला स्तर पर छोटे प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएं। इन इकाइयों में टैबलेट, काढ़ा और हार्ट-केयर सप्लीमेंट जैसे उत्पाद तैयार कर ‘मेक इन बिहार’ के तहत राज्य सरकार के पोर्टल के माध्यम से उनकी ब्रांडिंग और विपणन किया जाए।

उन्होंने उत्तर बिहार में अर्जुन छाल के संरक्षित घटकों के आधार पर योजना बनाकर कच्चे माल का संग्रहण, प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना तथा सरकारी सहायता और पंजीकरण के माध्यम से खेती को बढ़ावा देने की मांग की, ताकि आयुर्वेद एवं होम्योपैथी पद्धति के अंतर्गत बिहार को हर्बल मेडिसिन का केंद्र बनाया जा सके।

भाषा कैलाश मनीषा रंजन

रंजन


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