राजद से भाजपा तक का सफर; सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने की ओर

राजद से भाजपा तक का सफर; सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने की ओर

राजद से भाजपा तक का सफर; सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने की ओर
Modified Date: April 14, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: April 14, 2026 5:25 pm IST

पटना, 14 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सम्राट चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल के नेता चुने जाने के साथ ही बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं।

बिहार की राजनीति में इस बदलाव के संकेत पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान ही मिल गए थे, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक चुनावी सभा में कहा था कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘‘बड़ा आदमी’’ बनाया जाएगा।

बिहार हिंदी पट्टी का वह प्रमुख राज्य रहा है, जहां लंबे समय तक प्रभावशाली उपस्थिति के बावजूद भाजपा सत्ता के शीर्ष पद तक नहीं पहुंच सकी थी।

सम्राट चौधरी ने वर्ष 2017 में भाजपा का दामन थामा। इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक राजद में रहे और करीब दो वर्ष तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) में भी रहे।

सम्राट चौधरी, पूर्व सैनिक से राजनेता बने शकुनी चौधरी के पुत्र हैं। शकुनी चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी और बाद में अलग-अलग समय में लालू प्रसाद तथा नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे।

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में की थी।

राजद के वर्ष 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद भी वह लंबे समय तक इस पार्टी के साथ बने रहे, लेकिन 2014 में एक बागी धड़े के साथ जद(यू) में शामिल हो गए, जब जीतन राम मांझी राज्य के मुख्यमंत्री थे। तीन वर्ष बाद उन्होंने जद(यू) छोड़कर भाजपा का रुख किया, जहां उन्हें एक प्रभावशाली वक्ता और कोइरी समुदाय के प्रमुख नेता के रूप में पहचान मिली।

उन्हें भाजपा की राज्य इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया, विधान परिषद का सदस्य बनाया गया और बाद में 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी सरकार में मंत्रिमंडल में स्थान मिला। मार्च 2023 में उन्हें भाजपा कर राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और उन्होंने लोकसभा सदस्य संजय जायसवाल की जगह ली।

कभी नीतीश कुमार के मुखर आलोचक रहे सम्राट चौधरी ने 2022 में जद(यू)-भाजपा अलग होने के बाद पगड़ी पहनने का संकल्प लिया था और कहा था कि वह इसे मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने के बाद ही उतारेंगे।

हालांकि, बाद में वह नीतीश के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए।

उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने भाजपा के विजय कुमार सिन्हा के साथ पद साझा किया, लेकिन उनकी राजनीतिक अहमियत तब और स्पष्ट हुई जब उन्हें गृह विभाग सौंपा गया, जो पहले नीतीश कुमार अपने पास रखते थे।

सम्राट चौधरी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को संतुष्ट रखने की क्षमता के कारण भी आगे बढ़े हैं, जबकि उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी नहीं रही है।

सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आने वाले बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले 1968 में सतीश प्रसाद सिंह इस समुदाय से मुख्यमंत्री बने थे, जिनका कार्यकाल मात्र पांच दिन का रहा था।

अब शीर्ष पद पर पहुंचने के बाद सम्राट चौधरी के सामने बिहार में भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक आधार के रूप में स्थापित करने की चुनौती होगी। साथ ही उन्हें जद(यू) जैसे सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखना होगा और छोटे सहयोगियों को भी साथ लेकर चलना होगा।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने उनके खिलाफ विभिन्न चुनावी हलफनामों में आयु संबंधी विसंगतियों और कथित आपराधिक मामलों को लेकर सवाल उठाए थे।

भाषा कैलाश खारी

खारी


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