असंगठित श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है नालसा योजना : न्यायमूर्ति साहू

असंगठित श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है नालसा योजना : न्यायमूर्ति साहू

असंगठित श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है नालसा योजना : न्यायमूर्ति साहू
Modified Date: February 22, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: February 22, 2026 10:27 pm IST

पटना, 22 फरवरी (भाषा) पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने रविवार को कहा कि नालसा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को शोषण से सुरक्षा, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करके उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

न्यायमूर्ति साहू पटना के ऊर्जा सभागार में आयोजित नालसा (असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कानूनी सेवाएं) योजना, 2015 पर एक विधिक जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

न्यायमूर्ति साहू ने कहा, “नालसा योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है और उन्हें शोषण से बचाने के लिए संरक्षण, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करती है।”

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन 1995 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था।

अर्थव्यवस्था में असंगठित श्रमिकों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए न्यायमूर्ति साहू ने कहा, “यद्यपि भारतीय अर्थव्यवस्था में उनका योगदान बहुत बड़ा है, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हें अक्सर बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जाता है।”

उन्होंने कहा कि इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय केवल धनी लोगों का विशेषाधिकार न बना रहे, बल्कि असंगठित श्रमिकों को भी निःशुल्क उपलब्ध हो।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप


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