बिहार में 2024-25 के दौरान कुत्तों के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले सामने आए: आर्थिक सर्वेक्षण

बिहार में 2024-25 के दौरान कुत्तों के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले सामने आए: आर्थिक सर्वेक्षण

बिहार में 2024-25 के दौरान कुत्तों के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले सामने आए: आर्थिक सर्वेक्षण
Modified Date: February 2, 2026 / 10:22 pm IST
Published Date: February 2, 2026 10:22 pm IST

पटना, दो फरवरी (भाषा) बिहार में वर्ष 2024–25 के दौरान कुत्ते के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले दर्ज किये गये। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में यह जानकारी दी गई।

सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्ष 2023-24 की तुलना में ये मामले लगभग 39 हजार अधिक हैं।

विधानसभा में सोमवार को पेश किये गये आर्थिक सर्वेक्षण में कुत्ते के काटने को राज्य में सबसे “व्यापक बीमारी” के रूप में चिन्हित किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–25 में कुल 2,83,274 लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए जबकि 2023–24 में यह संख्या 2,44,367 रही थी।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में औसतन हर दिन 776 लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए हालांकि रिपोर्ट में रेबीज के मामलों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों, खासकर कुत्तों के काटने से फैलता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि दूसरी सबसे व्यापक बीमारी एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (एआरआई) या इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाली बीमारी रही।

इस अवधि में राज्य में इस तरह के 31,025 मामले दर्ज किए गए।

कुत्ते के काटने के मामलों में पटना शीर्ष पर रहा, जहां 29,280 मामले दर्ज किए गए।

इसके बाद पूर्वी चंपारण (24,452), नालंदा (19,637), गोपालगंज (18,879), पश्चिमी चंपारण (17,820), जहानाबाद (12,900), गया जी (10,794), भोजपुर (10,496), पूर्णिया (10,373) और वैशाली (10,155) में लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए।

वहीं, जिन जिलों में वर्ष 2024–25 में 2,000 से कम मामले दर्ज किये गये, उनमें रोहतास (1,967), सुपौल (1,878), खगड़िया (1,565) और औरंगाबाद (467) शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, “कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़ या बंदर के काटने के कारण रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हर साल अनुमानित 59,000 लोगों की मौत रेबीज से होती है और इनमें अधिकांश मौतें संक्रमित कुत्तों के काटने से होती हैं।”

संगठन ने बताया कि रेबीज से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है और संपर्क के तुरंत बाद उपचार से जान बचाई जा सकती है लेकिन लक्षण दिखाई देने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है और परिणाम घातक होते हैं इसके अलावा, रिपोर्ट में सांप के काटने की घटनाओं को भी राज्य के लिए एक बड़ी चिंता बताया गया है।

वर्ष 2024–25 में राज्य में सांप के काटने से 138 मौतें दर्ज की गईं।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र


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