पटना, 11 सितंबर (भाषा) जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी का नाम बदलकर ‘जदयू-नीतीश’ करने के सुझाव पर विचार किया जा रहा है और यह प्रस्ताव पार्टी के सर्वोच्च नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सम्मान में सामने आया है।
जद यू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा के एक वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया कि पार्टी का अस्तित्व और पहचान नीतीश कुमार की वजह से है और उसकी विचारधारा उनके राजनीतिक दर्शन पर आधारित है। उन्होंने पार्टी का नाम ‘जदयू-नीतीश’ करने पर विचार करने की बात कही।
उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मंत्री श्रवण कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो दोनों नेताओं ने इसका समर्थन किया । ये दोनों समता पार्टी के समय से ही नीतीश के करीबी रहे हैं।
नालंदा के कुर्मी समुदाय से आने वाले श्रवण कुमार ने इस पर कहा, ‘‘इससे बेहतर प्रस्ताव हो ही नहीं सकता।’’
दोनों नेताओं ने उन्होंने जल्द औपचारिक प्रस्ताव लाने की मांग की और कहा कि यह सर्वसम्मति से पारित होगा।
जदयू का गठन 2003 में शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड और समता पार्टी के विलय से हुआ था। शरद यादव 2016 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, जबकि नीतीश कुमार को पार्टी का वास्तविक नेता माना जाता रहा। 2016 में नीतीश राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2017 में शरद यादव अलग हो गए।
नीतीश ने 2020 में अध्यक्ष पद छोड़ा और आरसीपी सिंह अध्यक्ष बने। केंद्र में मंत्री बनने को लेकर विवाद के बाद आरसीपी सिंह की जगह राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को अध्यक्ष बनाया गया। 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
अप्रैल 2026 में दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश ने पद छोड़ा, राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और उनके पुत्र निशांत नई भाजपा नीत सरकार में मंत्री बने।
इस बीच, राजद ने दावा किया कि नाम बदलने का प्रस्ताव जदयू में संभावित विभाजन का संकेत है।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि जदयू को भीतर से कमजोर कर भाजपा की मदद करने वाले लोग ऐसा सुझाव दे रहे हैं।
उन्होंने संजय कुमार झा और ललन सिंह पर भाजपा के ‘‘एजेंट’’ की तरह काम करने के आरोपों का जिक्र करते हुए दावा किया कि दो-तीन महीने में जदयू में टूट दिखाई देगी और अलग होने वाला धड़ा ‘जदयू-नीतीश’ नाम अपना सकता है।
भाषा कैलाश रंजन
रंजन