मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन चार्जिंग गतिविधियों में सबसे आगे हैं, जबकि चार पहिया वाहन कुल खपत होने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। एक रिपोर्ट में बात कही गई।
रिपोर्ट के अनुसार इससे पता चलता है कि चार्जिंग बुनियादी ढांचे को वाहनों की संख्या और उनकी ऊर्जा जरूरत, दोनों को ध्यान में रखकर तैयार करने की जरूरत है।
इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क संचालक ‘बोल्ट.अर्थ’ की ‘स्टेट ऑफ चार्ज’ रिपोर्ट के अनुसार, छह प्रमुख महानगरों में चालू वित्त वर्ष में अब तक हुई चार्जिंग गतिविधियों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 78.1 प्रतिशत रही है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 71.6 प्रतिशत थी।
इसके विपरीत, चार पहिया वाहनों की चार्जिंग गतिविधियों में हिस्सेदारी केवल 16 प्रतिशत रही, लेकिन उन्होंने कुल खपत होने वाली ऊर्जा का 67.3 प्रतिशत इस्तेमाल किया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह हिस्सेदारी 58.1 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अंतर ऐसे चार्जिंग बुनियादी ढांचे की जरूरत को दर्शाता है, जो वाहनों की संख्या और उनकी ऊर्जा जरूरत, दोनों को पूरा कर सके।
रिपोर्ट कंपनी के आंतरिक नेटवर्क से प्राप्त तकनीकी और परिचालन आंकड़ों पर आधारित है। इसमें छह महानगरों बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और कोच्चि में पिछले दो वित्त वर्षों और चालू वित्त वर्ष में अब तक के आंकड़ों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु 1,90,954 चार्जिंग गतिविधियों और 5,26,990 किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) ऊर्जा खपत के साथ सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जबकि हैदराबाद और कोच्चि में महानगरों के बीच वृद्धि सबसे तेज है।
रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में चार्जिंग बुनियादी ढांचे का अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, विजयवाड़ा (आंध्रप्रदेश), राजामहेंद्रवरम (आंध्रप्रदेश) और तिरुवनंतपुरम (केरल) जैसे उभरते मझोले और छोटे (दूसरी और तीसरी श्रेणी) शहरों में मांग तेजी से बढ़ रही है।
भाषा योगेश रमण
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