राजद के नवनिर्वाचित विधायक दल ने तेजस्वी यादव को अपना नेता चुना

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राजद के नवनिर्वाचित विधायक दल ने तेजस्वी यादव को अपना नेता चुना

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  • Publish Date - November 17, 2025 / 06:11 PM IST,
    Updated On - November 17, 2025 / 06:11 PM IST

पटना, 17 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नवनिर्वाचित विधायकों ने सोमवार को सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया।

विधानसभा चुनाव में राजद 143 सीट पर मैदान में थी लेकिन 25 सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई।

राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह ने बताया, “नवनिर्वाचित विधायकों ने सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुना।”

बैठक में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती और जगदानंद सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद थे।

हाल में संपन्न हुए चुनावों में महागठबंधन की ओर से तेजस्वी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे।

उन्होंने शीर्ष नेताओं और विधायकों के साथ चुनाव में अप्रत्याशित हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक एक पोलो रोड स्थित उनके सरकारी आवास पर हुई, जहां निर्वाचित विधायकों के साथ-साथ हारे प्रत्याशियों ने भी चुनावी परिस्थितियों की वास्तविक तस्वीर सामने रखी।

बैठक में आए विधायकों और प्रत्याशियों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पर कई आरोप लगाए।

मटिहानी से राजद विधायक बोगो सिंह ने दावा किया कि मतदान के दौरान “10-10 हजार रुपये बांटे गए और जीविका दीदियों के वोट खरीदे गए।” उन्होंने आरोप लगाया, “राजग की जमीन खिसक चुकी थी, इसलिए इस तरह के हथकंडे अपनाए गए।”

विधायक आलोक मेहता ने भी “स्पष्ट गड़बड़ी” का आरोप लगाया और कहा कि इसी कारण ऐसा अप्रत्याशित परिणाम सामने आया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।

पूर्व विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया, “वोटिंग से पहले करोड़ों लोगों के खातों में दस-दस हजार रुपये भेजे गए तथा जनता से कहा गया कि सरकार बनवा दीजिए तो दो लाख रुपये और दिए जाएंगे।”

उन्होंने इसे लोकतंत्र का “गला दबाने की संगठित कोशिश” बताया।

शाहीन ने यह भी दावा किया कि मतदान से ठीक पहले बाहरी राज्यों से हजारों लोग ट्रेन से बिहार पहुंचे, जिससे यह सवाल उठता है कि “उन्हें छुट्टी तथा पैसा किसने दिया और वे किसके पक्ष में मतदान कर गए।”

पार्टी सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव ने सभी हारे उम्मीदवारों से व्यक्तिगत तौर पर सुझाव भी लिया।

उन्होंने बताया कि समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि गलती कहां हुई-क्या संगठन कमजोर पड़ा, बूथ प्रबंधन ढीला रहा, या चुनावी संदेश जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया।

भाषा कैलाश

खारी

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