विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर बिहार की तीन आर्द्रभूमियों को मिला रामसर प्रमाण पत्र

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विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर बिहार की तीन आर्द्रभूमियों को मिला रामसर प्रमाण पत्र

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  • Publish Date - February 2, 2026 / 11:05 PM IST,
    Updated On - February 2, 2026 / 11:05 PM IST

पटना, दो फरवरी (भाषा) बिहार की तीन आर्द्रभूमियों को सोमवार को विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर रामसर प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

ये आर्द्रभूमियां पिछले वर्ष रामसर सूची में शामिल की गई थीं।

अधिकारियों के अनुसार, ये प्रमाणपत्र नयी दिल्ली में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (बिहार) के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर को सौंपे गए।

बक्सर स्थित गोकुल जलाशय और पश्चिमी चंपारण की उदयपुर झील को सितंबर 2025 में रामसर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जबकि कटिहार की गोगाबिल झील को मई 2025 में सूची में जोड़ा गया। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 98 और बिहार में छह हो गई है।

इससे पहले, जमुई जिले के नागी पक्षी अभयारण्य और नकटी पक्षी अभयारण्य को 2024 में रामसर सूची में शामिल किया गया था।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि “ये तीनों झीलें गंगा और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के लिए प्राकृतिक बफर का कार्य करती हैं।”

विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रतिवर्ष दो फरवरी को ईरान के रामसर में 1971 में अपनाई गई आर्द्रभूमि संधि की स्मृति में मनाया जाता है।

रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियां होती हैं जिन्हें उनके पर्यावरणीय, जैविक, जलवैज्ञानिक और सामाजिक महत्व के कारण अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया जाता है।

भाषा कैलाश राजकुमार

राजकुमार