* तारीख- 14 नवंबर 2025।
* समय- शाम के करीब 4 बजे।
* स्थान – भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली।
अवसर- बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत का जश्न समारोह। जिस समय इस समारोह में पार्टी नेता और कार्यकर्ता जश्न में डूबे थे, ठीक उसी समय दिल्ली से करीब डेढ़ हजार किलोमीटर दूर कोलकाता के साल्ट लेक स्थित पार्टी मुख्लायय में भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव राज्य में 5 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे।
ये बात मैं इसलिए याद दिला रहा हूं ताकि आपको भाजपा की चतुर्दिश सत्ता विस्तार की मुहिम के पीछे छिपी उसके जुनूनी प्रयासों की झलक मिल सके। वोटों के लिहाज से बंजर भूमि पर जनादेश की फसल लहलहाने के लिए किसी पार्टी को कितना जतन और बलिदान करना पड़ता है, पश्चिम बंगाल इसका ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण है। अंग (बिहार/असम) और कलिंग (उड़ीसा) के बाद अब बंग (पश्चिम बंगाल) को भी भगवा रंग में रंग कर भाजपा ने पूरी भारत भूमि को राष्ट्रवाद की छत्रसाया में ला दिया है।
दक्षिण और देश के चंद हिस्से को छोड़कर तकरीबन पूरा देश अब भगवा रंग में रंग चुका है। दक्षिण के कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में तो भाजपा की प्रभावी उपस्थिति पहले से है ही, और अब तमिलनाडू और केरल में भी अगले दो चुनावों में पश्चिम बंगाल की तरह कमल खिल जाए तो हैरान मत होइएगा। सनातन को डेंगू, मलेरिया और एड्स बताने वाले DMK की कोढ़ी मानसिकता का तमिलनाडू की जनता तो इस चुनाव में भली-भांति इलाज कर ही चुकी है। उधर हिंदुत्व विरोधी वामदलों की उनके वजूद को बचाने वाले इकलौते राज्य केरल से भी विसर्जन के बाद अब इनकी मौजूदगी केवल JNU के गलियारों और NGO तक ही सिमट कर रह गई है।
स्थापना काल से लेकर हालिया पश्चिम बंगाल फतह तक की भाजपा के सत्ताविस्तार की यात्रा उसके पास मौजूद तमाम खूबियों का समुच्चय है। सांगठनिक क्षमता, प्रभावी नेतृत्वशीलता की परंपरा, राष्ट्रवादी मुद्दों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता, प्रदेश-काल और परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति की सृजनात्मकता और सबसे बढ़कर अपने प्रयासों को परिणाम में बदलने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे समर्पित संगठन के साथ की बदौलत आज भाजपा का अश्वमेघ का घोड़ा अपनी विजय पताका फहराता चतुर्दिश दौड़ रहा है।
लेकिन पश्चिम बंगाल की विजय इतनी आसान नहीं थी। भाजपा को इसकी कीमत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवकों के अलावा अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का बलिदान देकर चुकानी पड़ी है। पिछले चुनाव में हार के बाद जिस तरह भाजपा समर्थकों का कत्लेआम मचाया गया था, उसकी तोहमत से भाजपा खुद को बरी नहीं सकी। इसलिए इस बार चुनौती अपने समर्थकों को उनके जानमाल का भरोसा दिलाने की थी, जिसे भाजपा अपनी राजनीतिक-प्रशासनिक रणनीतिक चक्रव्यूह के जरिए अंजाम तक पहुंचाने में सफल रही।
भाजपा की पश्चिम बंगाल में मौजूदगी पिछले दो चुनावों में 3 सीटों से बढ़कर 77 सीटों तक पहुंच चुकी थी। वोट प्रतिशत भी 10.16 फीसदी से बढ़कर 38.10 फीसदी हो गया था। भाजपा के सामने असली चुनौती बहुमत हासिल करने के लिए सीटों की संख्या को डबल करने और वोट प्रतिशत का फासला करीब 12 फीसदी बढ़ाने का था। ये बात किसी से छिपी नहीं थी कि तृणमूल कांग्रेस को मिलने वाले वोटों में बड़ा हिस्सा अवैध घुसपैठियों का रहता है। इन अवैध घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से बाहर किए बिना वोट के 12 फीसदी यानी करीब 60 लाख वोटों के फासले को पाट पाना नामुमकिन था। इस फासले को केंद्र सरकार ने SIR प्रक्रिया के तहत करीब 90 लाख अवैध वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर करके मुमकिन कर दिखाया।
दूसरी बड़ी चुनौती अपने समर्थक वोटरों को बिना भय के मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की थी। ये राह आसान नहीं थी, इसके लिए पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया में जड़ जमाए बैठे सत्ता और घुसपैठियों के नेक्सस को तोड़ने की जरूरत थी। गृह मंत्री ने मतदान केंद्रों तक मतदाताओं को बिना डर के पहुंचाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया। इसके लिए 2 लाख 40 हजार से ज्यादा सुरक्षाबलों की तैनाती की गई। चाक चौबंद सुरक्षा इंतजाम ने मतदाताओं को भयमुक्त मतदान का भरोसा दिलाया। इस भरोसे की परिणति ऐतिहासिक मतदान के रूप में सामने आई, और नतीजा सामने है।
एक बार जब मतदाता सूची से फर्जी वोटर हट गए, मतदान केंद्रों तक मतदाताओं का बिना भय के पहुंचाना सुनिश्चित हो गया तो फिर बाकी काम 15 साल की एंटी इनकंबेंसी ने कर दिया। चौपट कानून व्यवस्था, भ्रष्ट शासन तंत्र, बेराजगारी, संसाधनों में घुसपैठियों का कब्जा, हिंदू विरोधी और मुस्लिम परस्त शासन की छवि जैसी तमाम ऐसे कारक थे, जो ज्वालामुखी के समान जमीन के नीचे अंदर ही अंदर धधक रहे थे। जैसे ही केंद्र सरकार ने इस असंतोष और आक्रोश को मतदान के जरिए जाहिर करने का जरिया मुहैया कराया, ये आक्रोश वोटों की सुनामी बनकर TMC का सूपड़ा साफ कर गया।
– लेखक IBC24 में डिप्टी एडिटर हैं
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