NindakNiyre: क्या छत्तीसगढ़ में मुद्दों को लेकर घेर पा रही है कांग्रेस- भाग-2

NindakNiyre: क्या छत्तीसगढ़ में मुद्दों को लेकर घेर पा रही है कांग्रेस- भाग-2
Modified Date: January 26, 2026 / 06:55 pm IST
Published Date: January 26, 2026 6:52 pm IST

बरुण सखाजी श्रीवास्तव
(राजनीतिक विश्लेषक)

छत्तीसगढ़ कांग्रेस साय सरकार को घेरने की हर संभव कोशिश कर रही है। लेकिन यह नहीं कह सकते कि वह घेर पा रही है या नहीं। हमारा चुनावी तंत्र इतना मैच्योर हो गया है कि जब किसी को चुना गया है पांच सालों के लिए है तो दो साल में ही नकारात्मक क्यों हुआ जाए। यह तो बात हुई चुनावी मनोविज्ञान की, लेकिन इसके इतर क्या छत्तीसगढ़ की कांग्रेस साय सरकार को घेरने की कोशिश में कोई कसर कर रही है या कि वास्तव में घेर पा रही है। इसे ठीक तरह से समझने की कोशिश करते हैं।

मुद्दों पर कांग्रेस की हालत

2023 में सत्ता परिवर्तन हुआ तो इसमें भाजपा की सकारात्मकता देखकर कम कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की नकारात्मकता देखकर ज्यादा वोटिंग हुई थी। इसलिए मौजूदा सरकार से यूं भी जनता ने बहुत उम्मीदें पाली नहीं थी। इसलिए अगर सरकार मुद्दों के साथ सही न्याय नहीं भी कर पा रही हो तो जनता के बीच में अभी यह नकारात्मकता के साथ नहीं पहुंचा है। इस विश्लेषण में मोटामोटी मुद्दे समझें तो धान खरीदी ऐसा मसला है जिसमें सरकार फिसड्डी नहीं मिसमैनेज साबित हुई है। इसी तरह से फैसलों में, टंकण त्रुटियों के मामले में सरकार ने अपनी ही क्षमता से भरपूर किरकिरी करवाई है। कांग्रेस की नजर में विधि और व्यवस्था से जुड़ा मसला सरकार संभाल नहीं पा रही। यह बात एक हद तक सही भी है, कारण जो भी हो। अब सवाल है लॉ एंड ऑर्डर के मसले में क्या कांग्रेस मुद्दों को माउंट कर पा रही है। दीपक बैज ने इस मामले में ठीक काम किया है। यह एक ऐसा मसला है जो साधारण आदमी जेहन में धीरे-धीरे स्थापित हो रहा है। परसेप्शन की लड़ाई में कांग्रेस की यह कामयाबी कही जानी चाहिए। बड़े मसलों में दूसरा मसला धान खरीदी का है। सरकार ने अपनी ओर से धान खरीदी में कोई कसर नहीं छोड़ी। भरपूर बजट रखा, किसानों की संख्या का कोई बंधन नहीं रखा, रकबा बढ़ाया हुआ रखा, सब कुछ अच्छा किया, लेकिन अनुपालन में बेसिक विसंगतियों और गलतियों पर सही ढंग से काम नहीं किया। सिवाय ट्रांसफर, सस्पेंशन, फटकार के कुछ भी नहीं किया। जिला कलेक्टर्स सरकार को घुमा रहे हैं, सरकार घूम रही है। कहा जा सकता है सरकार ने पैसे लगाए, लोग जुटाए, किसानों की खरीदी भी की लेकिन परसेप्शन यह बना कि सरकार की दाढ़ी में तिनका है। यह तिनका ही कांग्रेस ने चिपकाया है। अर्थ साफ है इस मामले में भी कांग्रेस सफल रही है और सरकार विफल। मंत्रियों के बोल-चाल, विधायकों के आचरण के मामले में कांग्रेस परसेप्शन बनाने में नाकायाब है। नक्सली मोर्चे पर कांग्रेस ने जो कुछ धान और ल़ॉ एंड ऑर्डर पर जनता की राय बनाने में श्रम लगाया वह यहां गंवा दिया। बारंबार नक्लियों के फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाकर सरकार की एक्टिविटी और प्रशासनिक लीपापोती या अन्याय की वृत्ति को मजबूत किया है। इस तरह से कह सकते हैं कांग्रेस मुद्दों के मामले में धान, किसान, लॉ एंड ऑर्डर में सफल रही तो नक्सल पर इतनी विफल कि उसकी दूसरी सफलता इज इक्वल टु जीरो हो गई। जिन मुद्दों पर ढंग से काम नहीं हो पा रहा उनमें सड़कों की हालत खराब, शिक्षा व्यवस्था बेपटरी पर, चिकित्सा की दयनीय हालत, अर्बन अधोसंरचना में गिरावट, अच्छे खासे आत्मानंद स्कूलों का बंटाढार कर डालना, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी इनिशिएटिव सरकार के नहीं लिए, भर्ती परीक्षाएं अंजाम तक नहीं पहुंच पा रहीं, पीएम आवास की गुणवत्ता, जमीनों की हेराफेरी, पुलिस, प्रशासन का भ्रष्टाचार, खनन में मनमानी जैसे मसलों को कांग्रेस छूकर निकल रही है। उसे चाहिए जिन मुद्दों पर वह पिछड़ी है उनकी क्षतिपूर्ति इन बारीक मसलों से कर सकती है। सबसे बड़ा मसला सरकार के भीतर अंदरूनी विरोधाभास और आंतरिक अविश्वास निर्णायक सरकार की राह में रोड़ा के रूप में पेश किया जा सकता है, जिसमें कांग्रेस फेल है।

( भाग-3 में पढ़िए, कांग्रेस की 2027-28 की क्या रणनीति होना चाहिए। भाग-1 पढ़ने के लिए ब्लॉग पर जाएं।)

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NindakNiyre: छत्तीसगढ़ में कैसे रिवाइव कर सकती है कांग्रेस- भाग-1


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Associate Executive Editor, IBC24 Digital