#IBC24InBastar: नक्सलवाद बना वसूली का जरिया और पीछे छूटी विचारधारा? आखिर बस्तर को कैसे मिलेगी इस नासूर से निजात, देखें वीडियो
#IBC24InBastar: नक्सलवाद बना वसूली का जरिया और पीछे छूटी विचारधारा? आखिर बस्तर को कैसे मिलेगी इस नासूर से निजात, देखें वीडियो
चित्रकोट: #IBC24InBastar जिस तरह देश की सियासत का उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है ठीक इसी तरह छत्तीसगढ़ की राजनीति को भी बस्तर सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। राजनीतिक पंडितो का भी मानना है कि सत्ता के लिए बस्तर जीतना सबसे जरूरी है। रायपुर की राजनीति का रास्ता बस्तर की वादियों से होकर ही गुजरता है। यही वजह है की अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर से लेकर मौजूदा छत्तीसगढ़ की राजनीति में बस्तर का दखल हमेशा देखा गया है। हर सियासी दलों की नजर बस्तर पर रही है और हर कोई यहाँ से सबसे ज्यादा विधायकों की जीत भी सुनिश्चित करने की कोशिश में रहती है।
#IBC24InBastar वैसे तो छत्तीसगढ़ में बस्तर को नक्सलियों के गढ़ से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां के कई इलाका उनके कब्जा में हैं। बस्तर डिवीजन घने जंगलों में लगभग 39,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ऐसा माना जाता है कि 20,000 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा नक्सलियों से प्रभावित है। इस इलाके में पुलिस-प्रशासन की उपस्थिति न के बराबर है। आपको बता दें कि बस्तर आज भी अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है। इन्ही समस्याओ, उनकी वजह और निदान पर चर्चा करने आईबीसी24 लेकर आया है बस्तर का चुनाव..पार लगेगी किसकी नाव? का विशेष कवरेज
बस्तर के सियासत की गहराई को समझाने और यहाँ की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञ के तौर पर हमारे साथ मौजूद है पत्रिका बस्तर के सम्पादक मनीष गुप्ता, हरिभूमि ब्यूरो प्रमुख सुरेश रावल, दंडकारण्य समाचार के प्रमुख श्रीनिवास रथ, नवभारत के बस्तर क्षेत्र प्रतिनिधि शिव प्रकाश, बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह, आईबीसी24 के बस्तर प्रतिनिधि नरेश मिश्रा, आईबीसी24 के एक्जक्यूटिव एडिटर बरुन सखाजी और सबसे प्रमुख आईबीसी24 के एडिटर-इन-चीफ रविकांत मित्तल।
बस्तर में नक्सलवाद और समाधान
यहां के वरिष्ठ पत्रकारों का मनाना है कि हर चुनाव में नक्सलवाद मुद्दा बनता है और इसमें नक्सली हमेशा चुनाव का बहिष्कार करते हैं लेकिन करते कुछ नहीं हैं। पहले उनका मिशन था अब उनका कमीशन बन गया है। हर आदमी जानता है कि नक्सली हमेशा भय और खौफ का वातावरण पैदा करते हैं। ताकी उनकी वसूली अच्छी तरह से होती रहे। कई ऐसे लोग भी है जो चाहते है कि नक्सलवाद बना रहें और केंद्र से भी अच्छा फंड आता रहे। नक्सली कुछ न कुछ ऐसे काम करते है जिससे उनका खौफ लोगों के बीच बना रहे है।
क्या पूरी तरह से करप्ट हो गया है नक्सली?
वरिष्ठ पत्रकार का मनाना है कि नक्सली पूरी तरह से करप्ट हो गया है। केवल वसूली करना ही उनका उद्देश्य है। अभी नक्सल समस्या में दो तरह के विवाद पैदा हा रहा है। एक आंध्रप्रदेश के नक्सली और दूसरा बस्तर के नक्सली। बस्तर के नक्सली भी कई दल में कमांडर है। ये लोग लगातार विरोध कर रहे हैं कि जो भी फंड आता है वो आंध्रप्रदेश चला जाता है। नक्सलियों के जो बड़े लीडर है उनके बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं, हवाई सफर कर रहे है। अंबुझमाड़ आते हैं तो हेलीकाप्टर से आते हैं। यहां जो मर रहे है वो यहां के आदिवासी नक्सली। तो ये भी एक मुद्दा बन गया है। नक्सलियों में भी एक बहुत बड़ा मतभेद पैदा हो गया हैं और अब धीरे धीरे बस्तर का आदिवासी जाग रहा है और आगे चल ये समस्या भी खत्म हो जाएगी।

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