Chhattisgarh High Court Judgment: शादी के सपने दिखाकर संबंध बनाना अपराध नहीं, हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh High Court Judgment: शादी के सपने दिखाकर रेप करना अपराध नहीं, हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh High Court Judgment: शादी के सपने दिखाकर संबंध बनाना अपराध नहीं, हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh High Court Judgment/Photo Credit: AI Image

Modified Date: July 1, 2026 / 01:30 pm IST
Published Date: July 1, 2026 1:28 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी
  • अदालत ने कहा कि लंबे समय तक लिव-इन संबंध में केवल बाद में शादी से इनकार कर देने से स्वतः दुष्कर्म का अपराध नहीं
  • हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि या न्यायिक चूक नहीं थी

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court Judgment: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा, कि लंबे समय तक चले लिव-इन संबंध और दोनों पक्षों के आचरण से यदि संबंध सहमति जैसा लगता है, तो केवल बाद में शादी से इनकार कर देने के आधार पर दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की डीबी ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा, कि पहले लिव-इन रिलेशनशिप सामान्य नहीं थे, लेकिन अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं अपनी इच्छा और समझ के आधार पर जीवन से जुड़े निर्णय लेने में सक्षम हैं।

शादी का भरोसा देकर बनाए संबंध

Chhattisgarh High Court Judgment दरअसल, 40 वर्षीय महिला ने वर्ष 2019 में आईआईएम रायपुर के एमबीए कार्यक्रम में प्रवेश लिया था। जहां उसकी पहचान सहपाठी आरोपी से हुई। शिकायत के मुताबिक, 5 जुलाई 2019 को आरोपी ने पढ़ाई के बहाने उसे अपने घर बुलाया, जहां अन्य कोई छात्र मौजूद नहीं था। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। इसके बाद दोनों लंबे समय तक रिश्ते में रहे। महिला का कहना था कि जब भी वह विवाह की बात करती, आरोपी टाल देता।

Chhattisgarh High Court Judgment अगस्त 2021 में आरोपी ने कथित रूप से कहा कि महिला के तलाकशुदा होने और ईसाई समुदाय से होने के कारण उसके माता-पिता विवाह के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद महिला ने राज्य महिला आयोग और पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति से संबंध स्थापित होने के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।

इस फैसले को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि, अवैधता या न्यायिक चूक नहीं है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी कारण अपील प्रारंभिक सुनवाई पर खारिज कर दिया गया।

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.