Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा कल! घर में विजय पताका लगाने से पहले इस दिशा का रखें खास ध्यान, वरना शुभ अवसर पर हो सकता है उल्टा असर!

Gudi Padwa 2026: भारतीय संस्कृति में हर त्योहार नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र में उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन घर के बाहर लगाई जाने वाली विजय पताका (गुड़ी) सुख, समृद्धि और विजय का प्रतीक है, लेकिन इसे सही दिशा और विधि से लगाना आवश्यक है।

Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा कल! घर में विजय पताका लगाने से पहले इस दिशा का रखें खास ध्यान, वरना शुभ अवसर पर हो सकता है उल्टा असर!

(Gudi Padwa 2026/ Image Credit: IBC24 News)

Modified Date: March 18, 2026 / 11:12 am IST
Published Date: March 18, 2026 11:07 am IST
HIGHLIGHTS
  • गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का प्रतीक है।
  • विजय पताका सुख और समृद्धि दिखाती है।
  • गुड़ी पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।

Gudi Padwa 2026 Puja Vidhi: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा नववर्ष की शुरुआत का पावन समय होता है। इस दिन न केवल प्रकृति नई करवट लेती है, बल्कि जीवन में भी नई शुरुआत का संदेश मिलता है। महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में इसे गुड़ी पड़वा के रूप में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। घर के बाहर लगाई जाने वाली विजय पताका (गुड़ी) केवल ध्वज नहीं, बल्कि नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत और आने वाले समय में सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

गुड़ी पड़वा कब मनाया जाएगा?

इस साल 2026 में गुड़ी पड़वा 19 मार्च को मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा सुबह 06:52 बजे शुरू होगी और 20 मार्च की सुबह 04:52 बजे समाप्त होगी। इसलिए पूरे देश में 19 मार्च को ही इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

गुड़ी का महत्व और संदेश

गुड़ी पड़वा को हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। यह दिन जीवन में नए अवसरों और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। घर के बाहर लगाई जाने वाली गुड़ी यह संकेत देती है कि घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा। इसे लगाने का उद्देश्य पुराने दुखों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करना और सफलता की ओर कदम बढ़ाना है।

विजय पताका लगाने की सही दिशा

गुड़ी को हमेशा घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास ऊंचाई पर लगाना शुभ माना जाता है। इसे लगाने का सही तरीका बहुत जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा में गुड़ी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है। सबसे शुभ दिशा पूर्व या उत्तर मानी जाती है। पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा है और ऊर्जा, प्रकाश तथा नई शुरुआत का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है।

गुड़ी सजाने की विधि

गुड़ी लगाने के लिए लंबी बांस की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके ऊपर पीला या केसरिया रेशमी कपड़ा बांधा जाता है। नीम की पत्तियां और फूलों का हार सजावट के लिए उपयोग किया जाता है। सबसे ऊपर तांबे या चांदी का लोटा उल्टा रखा जाता है। इसे जमीन पर नहीं, बल्कि ऊंचे स्थान पर मजबूती से बांधा जाता है। गुड़ी फहराते समय मन में खुशहाली और सकारात्मक भाव होना चाहिए। शाम को सूर्यास्त से पहले इसे ससम्मान उतार लेना चाहिए।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।