Epstein Files Controversy: एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर दुनिया भर में बवाल! अब जुड़ा एक और दिग्गज कारोबारी का नाम, कई महिलाओं से संपर्क होने की आशंका
एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर दुनिया भर में बवाल! अब जुड़ा एक और दिग्गज कारोबारी का नाम! UAE Epstein Files Controversy
नई दिल्ली। Epstein Files Controversy यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़े हाल में सार्वजनिक हुए दस्तावेज़ों में नाम आने के बाद दुबई की वैश्विक पोर्ट ऑपरेटर कंपनी DP World के चेयरमैन और सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। कंपनी ने घोषणा की कि उनका इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। कंपनी ने एस्सा काज़िम को नया चेयरमैन और युवराज नारायन को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। बताया गया है कि कंपनी की वेबसाइट से सुलायेम की तस्वीर भी हटा दी गई है।
निवेशकों का दबाव, कईयों ने निवेश हटाने का किया ऐलान
Epstein Files Controversy हाल में जारी तथाकथित ‘एपस्टीन फ़ाइल्स’ से संकेत मिला है कि सुलायेम और एपस्टीन के बीच 2007 से 2017 के बीच सैकड़ों ईमेल्स का आदान-प्रदान हुआ। इन ईमेल्स में कारोबारी सलाह, अंतरराष्ट्रीय संपर्क, यात्रा योजनाएं और निजी बातचीत शामिल बताई गई हैं। हालांकि, दस्तावेज़ों में नाम आने को किसी आपराधिक कृत्य का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना गया है। दस्तावेज़ सार्वजनिक होने के बाद कंपनी पर दबाव बढ़ा। ब्रिटेन की डेवलपमेंट फ़ाइनेंस एजेंसी और कनाडा की पेंशन फंड ‘ला कैस’ ने डीपी वर्ल्ड में नए निवेश को निलंबित करने की घोषणा की। इसके अलावा, डीपी वर्ल्ड से फंडिंग पाने वाली प्रिंस ऑफ वेल्स की संस्था ‘अर्थशॉट प्रोजेक्ट’ ने यूके चैरिटी कमीशन को रिपोर्ट दी है। दस्तावेज़ों से संकेत मिलता है कि एपस्टीन ने सुलायेम का परिचय कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से कराया, जिनमें इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री Ehud Barak, अमेरिकी रणनीतिकार Steve Bannon और ब्रिटेन के पूर्व बिज़नेस सेक्रेटरी Peter Mandelson शामिल हैं।
निजी ईमेल्स पर भी सवाल
कुछ ईमेल्स में महिलाओं और निजी संबंधों को लेकर बातचीत का भी उल्लेख है। हालांकि इन संदेशों का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार, सुलायेम और एपस्टीन के बीच संपर्क कम से कम 2017 तक जारी रहा, जो एपस्टीन की 2008 की पहली आपराधिक सज़ा के बाद का समय है।
वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका
डीपी वर्ल्ड दुबई सरकार के स्वामित्व वाली लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो छह महाद्वीपों में पोर्ट टर्मिनल संचालित करती है और वैश्विक व्यापार ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी की साख और भविष्य की निवेश योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, कंपनी के नए नेतृत्व के सामने भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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