बंगाल में जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई में 10,000 क्विंटल कच्चा जूट जब्त

बंगाल में जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई में 10,000 क्विंटल कच्चा जूट जब्त

बंगाल में जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई में 10,000 क्विंटल कच्चा जूट जब्त
Modified Date: January 13, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: January 13, 2026 7:20 pm IST

कोलकाता, 13 जनवरी (भाषा) जूट कमिश्नर के कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि उसने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई के तहत पश्चिम बंगाल के कई जिलों से करीब 10,000 क्विंटल कच्चा जूट जब्त किया है।

यह जब्ती जूट और जूट टेक्सटाइल कंट्रोल ऑर्डर, 2016 के तहत की गई, क्योंकि कुछ व्यापारी, बेलर और स्टॉकिस्ट नकली तरीके से कीमतें बढ़ाने के लिए कच्चे जूट की जमाखोरी कर रहे थे।

एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, जब्त किया गया स्टॉक मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी 24 परगना और नादिया जिलों के 16 गोदामों से बरामद किया गया था, और यह जूट कमिश्नर द्वारा तय की गई कानूनी स्टॉक सीमा से ज़्यादा पाया गया।

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इस कार्रवाई का मकसद मिलों को कच्चे जूट की बराबर आपूर्ति सुनिश्चित करना और जूट मिल मजदूरों की रोजी-रोटी बचाना था।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि जूट कमिश्नर ने कथित जमाखोरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें पश्चिम बंगाल पुलिस की क्रियान्वयन शाखा में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज कराना भी शामिल है। जब्ती की रिपोर्ट, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को भी भेज दी गई है, जिन्हें सामान जब्त करने का अधिकार है।

हालांकि, उद्योग के अंशधारकों ने चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई से जूट मिलों के सामने कच्चे माल का मौजूदा संकट और बढ़ सकता है।

जूट बेलर्स एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जमाखोरी के खिलाफ पिछले कुछ हफ्तों से छापेमारी हो रही है। अधिकारी ने कहा, ‘‘एक बार कच्चा जूट जब्त हो जाने के बाद, यह तुरंत बाजार में वापस नहीं आता है। सही प्रक्रिया के कारण इसमें छह महीने या उससे ज़्यादा समय लग सकता है, जिससे उपलब्धता और कम हो जाएगी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि मिलें पहले से ही भारी कमी से जूझ रही हैं।

जूट उद्योग के एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि लंबे समय तक जब्ती के बजाय, सरकार को गलत व्यापारियों पर जुर्माना लगाना चाहिए। उद्योग के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कई जूट मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि दूसरी मिलों को कच्चे जूट की कमी और कीमतें 13,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर जाने की वजह से उत्पादन में भारी कमी करनी पड़ी है।

भाषा राजेश राजेश पाण्डेय

पाण्डेय


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