वाराणसी, तिरुपति समेत 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पीपीपी मॉडल पर सौंपे जाएंगे

वाराणसी, तिरुपति समेत 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पीपीपी मॉडल पर सौंपे जाएंगे

वाराणसी, तिरुपति समेत 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पीपीपी मॉडल पर सौंपे जाएंगे
Modified Date: August 24, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: August 24, 2026 5:46 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) सरकार वाराणसी एवं तिरुपति समेत 11 हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की योजना बना रही है। इन हवाईअड्डों को पांच समूहों में 50 साल के लिए पट्टे पर दिया जाएगा।

एक आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, नागर विमानन मंत्रालय ने देश के 11 हवाई अड्डों के लिए निजी भागीदारों को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। एक समूह में शामिल सभी हवाई अड्डों को किसी एक कंपनी को ही दिया जाएगा।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) ने चार अगस्त को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर की अगुवाई वाली पीपीपीएसी ने केंद्रीय क्षेत्र वाली पीपीपी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया।

इस प्रस्ताव के तहत पांच बड़े हवाई अड्डों को छह छोटे हवाईअड्डों के साथ समूह बनाया गया है। अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल एक समूह में रखा गया है जबकि वाराणसी, गया और कुशीनगर दूसरे समूह में होंगे। भुवनेश्वर और हुबली एक समूह में जबकि रायपुर और औरंगाबाद दूसरे समूह में होंगे। इसी तरह, तिरुचिरापल्ली और तिरुपति हवाई अड्डों को पांचवें समूह में रखा गया है।

बाजार में केंद्रीकरण और अत्यधिक कर्ज से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए एक ही बोलीदाता को दिए जा सकने वाले हवाई अड्डा समूहों की संख्या की सीमा तय की जाएगी।

इन हवाई अड्डों का परिचालन संभालने वाली निजी कंपनियों द्वारा कुल 8,622 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने का अनुमान है।

मंत्रालय ने हवाईअड्डों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के बाद एएआई के मौजूदा कर्मचारियों को शामिल करते हुए एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि का प्रस्ताव रखा है। इसके बाद परिचालक कंपनी को तीन साल तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखना होगा।

दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘पिछले अनुभवों से पता चलता है कि परिचालक कंपनी के साथ इस तरह की व्यवस्था एएआई कर्मचारियों को स्वीकार्य रही है।’’

पिछली बार की प्रक्रिया में एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि और दो साल की मानद प्रतिनियुक्ति अवधि का प्रावधान था।

दस्तावेज कहता है कि मौजूदा दौर के लिए 11 हवाई अड्डों का चयन एएआई ने चरणबद्ध और आंकड़ा आधारित प्रक्रिया के जरिये किया।

पहले 12 बड़े हवाई अड्डों का आकलन यात्री यातायात, भूमि उपलब्धता, वाणिज्यिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन समेत विभिन्न मानकों पर किया गया। इसके बाद 136 छोटे हवाई अड्डों का बड़े हवाई अड्डों के साथ समूह बनाने की संभावना के आधार पर मूल्यांकन किया गया।

सरकार ने इससे पहले 2018-19 में भी एएआई के छह हवाई अड्डों को पीपीपी मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपा था।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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