नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत शिल्पकारों और कारीगरों सहित 2,500 से अधिक लाभार्थियों को उनकी आजीविका और व्यावसायिक क्षमता में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) का प्रशिक्षण दिया गया है।
एक बयान के अनुसार यह पहल ‘सामाजिक भलाई के लिए एआई’ के विजन के अनुरूप है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान जोर दिया था और जो दिल्ली घोषणापत्र में भी झलकता है।
भारत सरकार के मंत्रालयों में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसका मकसद जमीनी स्तर के कारीगरों को तेजी से विकसित हो रहे एआई परिवेश से जोड़ना है।
मंत्रालय का लक्ष्य पारंपरिक शिल्प कौशल में एआई को शामिल करके जमीनी स्तर के उद्यमियों के लिए डिजिटल अंतर को कम करना, उत्पाद के मूल्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, कारीगरों को नए बाजारों तक पहुंच प्रदान करना और समावेशी आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना है।
प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, इंडस और गूगल जैमिनी जैसे प्रमुख एआई मंचों से परिचित कराया गया, ताकि वे वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए तकनीक का लाभ उठा सकें।
भाषा पाण्डेय
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