33 प्रतिशत महिलाओं ने मानी कार्यस्थलों में वेतन असमानता की बात: रिपोर्ट
33 प्रतिशत महिलाओं ने मानी कार्यस्थलों में वेतन असमानता की बात: रिपोर्ट
मुंबई, सात मार्च (भाषा) भारत के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली 67 प्रतिशत से अधिक महिलाओं का मानना है कि उनके कार्यस्थलों में वेतन समानता मौजूद है, जबकि 33 प्रतिशत महिलाओं को लगता है कि वेतन में अंतर है। नौकरी डॉट कॉम की शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
‘व्हाट वीमेन प्रोफेशनल्स वांट’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट देश के 50 से अधिक उद्योगों की 50,000 महिलाओं के बीच किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है।
रिपोर्ट के अनुसार, 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके कार्यस्थलों पर वेतन समानता है, जबकि 33 प्रतिशत ने माना कि वहां समानता नहीं है। वेतन में अंतर होने की बात रियल एस्टेट (42 प्रतिशत) के पेशेवरों ने सबसे दृढ़ता से कही, जिसके बाद एफएमसीजी (38 प्रतिशत), दवा और जीवन विज्ञान (38 प्रतिशत) और वाहन (37 प्रतिशत) क्षेत्र का स्थान रहा।
रिटेल (35 प्रतिशत), होटल एवं रेस्तरां (35 प्रतिशत), आईटी सेवाएं (34 प्रतिशत), टेलीकॉम (34 प्रतिशत), चिकित्सा सेवा (33 प्रतिशत) और तेल एवं गैस क्षेत्र (33 प्रतिशत) की महिलाओं ने भी माना कि वेतन में असमानता या अंतर मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस रिपोर्ट में समान वेतन ऑडिट और मासिक धर्म अवकाश की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला गया है। उच्च वेतन श्रेणी वाले पेशेवरों में यह मांग सबसे अधिक देखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, समान वेतन ऑडिट और मासिक धर्म अवकाश की मांग पिछले वर्ष के 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है। अधिक वेतन पाने वाली महिलाओं में यह मांग 48 प्रतिशत रही, जो दर्शाता है कि महिलाएं नेतृत्व के जितने करीब पहुंचती हैं, उन्हें अंतर उतना ही अधिक दिखाई देता है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं ने भेदभाव के डर से विवाह या मातृत्व जैसी अपनी व्यक्तिगत योजनाओं को साझा नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक, हर दो में से एक महिला (50 प्रतिशत) साक्षात्कार के दौरान अपनी शादी या मातृत्व संबंधी योजनाओं को साझा करने में हिचकिचाती है, जिसमें 34 प्रतिशत महिलाओं ने इसकी मुख्य वजह भेदभाव का डर बताया है।
यह हिचकिचाहट अनुभव बढ़ने के साथ और गहरी होती जाती है। नवागंतुकों में यह दर 29 प्रतिशत है, जो 10-15 साल के अनुभव वाली महिलाओं में बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
करीब 42 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि भर्ती और पदोन्नति में होने वाला भेदभाव कार्यस्थल पर उनकी सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले वर्ष की तुलना में इस धारणा में सात आधार अंकों की वृद्धि हुई है। चेन्नई (44 प्रतिशत) और दिल्ली/एनसीआर (43 प्रतिशत) जैसे महानगरों में भी यही रुझान देखा गया है।
इन चुनौतियों के बीच 83 प्रतिशत महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिकाएं निभाने के लिए खुद को प्रोत्साहित महसूस किया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 66 प्रतिशत था। दक्षिण भारतीय शहरों की महिलाओं में नेतृत्व की इच्छा विशेष रूप से प्रबल देखी गई।
इन्फो एज इंडिया की समूह सीएमओ सुमीत सिंह ने कहा, ‘यह तथ्य कि 83 प्रतिशत महिलाएं नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित महसूस करती हैं, उत्साहजनक है। हालांकि, यह चिंता का विषय है कि हर दो में से एक महिला को साक्षात्कार में अब भी अपनी व्यक्तिगत योजनाएं छिपानी पड़ती हैं। यह बताता है कि अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।’
इन्फो एज इंडिया ‘नौकरी डॉट कॉम’, ‘जीवनसाथी डॉट कॉम’ और ’99एकड़ डॉट कॉम’ की मूल कंपनी है।
भाषा सुमित पाण्डेय
पाण्डेय

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