नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) भारत में 5जी स्मार्टफोन के महंगे होने की वजह से 4जी स्मार्टफोन बाजार में 2026 में सुधार के संकेत दिख रहे हैं और इसकी बिक्री सालाना आधार पर तीन प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। यह 2025 में दर्ज 48 प्रतिशत की गिरावट के बाद उल्लेखनीय वापसी होगी।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, कुल बाजार में 4जी स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 2025 के 11 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 13 प्रतिशत और 2027 में अनुमानित 15 प्रतिशत हो सकती है। महंगे कलपुर्जों की लागत बढ़ने से 4जी और 5जी उपकरण के बीच कीमत का अंतर बढ़ गया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए 5जी स्मार्टफोन महंगे हो गए हैं।
इसके परिणामस्वरूप, 10,000 रुपये से कम और 10,000-20,000 रुपये की श्रेणी के उपभोक्ता कम कीमत में बेहतर फीचर और अधिक मूल्य के लिए 4जी उपकरण का रुख कर रहे हैं।
काउंटरपॉइंट ने बयान में कहा, ‘‘कुल बाजार में गिरावट के बावजूद भारत में 4जी स्मार्टफोन की बिक्री 2026 में सालाना आधार पर तीन प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। 4जी की हिस्सेदारी 2025 के 11 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 13 प्रतिशत हो जाएगी।’’
इस बीच, मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) इस मांग को पूरा करने और 5जी मॉडल के महंगे दामों की ओर बढ़ने से पैदा हुई कमी को भरने के लिए 10,000-20,000 रुपये के दायरे में अपने 4जी स्मार्टफोन खंड का विस्तार कर रहे हैं।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक प्राचीर सिंह ने कहा, ‘‘भारत में 4जी की वापसी अब पारंपरिक शुरुआती स्तर की श्रेणी से आगे बढ़ रही है और 20,000 रुपये से कम कीमत वाले खंड में मांग बढ़ रही है। 10,000-20,000 रुपये का खंड वृद्धि के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, क्योंकि उपभोक्ता 5जी से जुड़ी अधिक कीमत के बिना बेहतर फीचर व उपकरण अनुभव चाहते हैं।’’
इस बदलाव को देखते हुए ओईएम शुरुआती स्तर की श्रेणी से आगे अपने 4जी खंड का विस्तार कर रहे हैं।
वर्ष 2025 में बजट श्रेणी में 4जी मॉडल पेश करने वाली ओईएम की संख्या केवल दो थी, जो 2026 में अबतक बढ़कर 12 हो गई है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के शोध निदेशक तरुण पाठक का मानना है कि भारत के स्मार्टफोन बाजार में 4जी की भूमिका और महत्वपूर्ण होने वाली है और इसकी हिस्सेदारी 2026 के 13 प्रतिशत से बढ़कर 2027 में 15 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
पाठक ने कहा, ‘‘यह वृद्धि केवल स्मार्टफोन की ऊंची कीमतों की वजह से आया अल्पकालिक बदलाव नहीं है, बल्कि 4जी की भूमिका में व्यापक बदलाव को दर्शाती है। कलपुर्जों की कीमतें जल्द सामान्य होने के आसार नहीं हैं। उपभोक्ता कीमत के मुकाबले फीचर को अधिक महत्व दे रहे हैं, ऐसे में 4जी की प्रासंगिकता शुरुआती स्तर की श्रेणी से आगे बढ़ रही है, खासकर 20,000 रुपये से कम कीमत वाले खंड में।’’
पाठक ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि कीमत और मूल्य के इस व्यापक संतुलन से 4जी की मांग बनी रहेगी और ओईएम अधिक सक्षम 4जी उपकरण के साथ अपने खंड का विस्तार करेंगे। इससे भारत में 4जी की स्थिति में बदलाव आ सकता है और यह शुरुआती स्तर के संपर्क विकल्प से आगे बढ़कर व्यापक मूल्य विकल्प बन सकता है।’’
भाषा निहारिका अजय
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