Tobacco Price Hike 2026: 1 फरवरी से महंगे हो जाएंगे सिगरेट-पान मसाला, सरकार का बड़ा फैसला, जानें कितनी बढ़ेगी कीमतें?

Tobacco Price Hike 2026: 1 फरवरी से महंगे हो जाएंगे सिगरेट-पान मसाला, सरकार का बड़ा फैसला, जानें कितनी बढ़ेगी कीमतें?

Tobacco Price Hike 2026: 1 फरवरी से महंगे हो जाएंगे सिगरेट-पान मसाला, सरकार का बड़ा फैसला, जानें कितनी बढ़ेगी कीमतें?

Tobacco Price Hike 2026

Modified Date: January 1, 2026 / 10:34 pm IST
Published Date: January 1, 2026 10:28 pm IST
HIGHLIGHTS
  • लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक उत्पाद शुल्क बढ़ा
  • पान मसाला पर कुल कर भार 88% और गुटखा पर 91% तय
  • विनिर्माताओं को पैकिंग मशीनों पर CCTV निगरानी अनिवार्य

नयी दिल्ली: Tobacco Price Hike 2026 सरकार ने संशोधित कर ढांचे के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर एक फरवरी से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का निर्णय लिया है जिसमें लंबी एवं प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन को अधिसूचित करते हुए सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क तय किया है।

Tobacco Price Hike 2026 यह शुल्क इन उत्पादों पर पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा। नई शुल्क व्यवस्था एक फरवरी से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम को भी अधिसूचित किया है, जिसके तहत पान मसाला से जुड़े कारोबार की विनिर्माण क्षमता पर उपकर लगाया जाएगा। पान मसाला पर 40 प्रतिशत जीएसटी को ध्यान में रखते हुए कुल कर भार 88 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

नया कर ढांचा तंबाकू उत्पादों पर लागू 28 प्रतिशत जीएसटी एवं क्षतिपूर्ति उपकर की मौजूदा व्यवस्था का स्थान लेगा। संशोधित ढांचे के तहत 65 मिलीमीटर तक की छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट पर प्रति स्टिक करीब 2.05 रुपये जबकि समान लंबाई की फिल्टर सिगरेट पर लगभग 2.10 रुपये अतिरिक्त शुल्क लगेगा। वहीं, 65 से 70 मिलीमीटर लंबाई वाली सिगरेट पर 3.6 से चार रुपये प्रति स्टिक, जबकि 70 से 75 मिलीमीटर लंबाई वाली प्रीमियम सिगरेट पर करीब 5.4 रुपये प्रति स्टिक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।

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‘अन्य’ श्रेणी में आने वाली असामान्य या गैर-मानक डिजाइन की सिगरेट पर 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक शुल्क तय किया गया है। हालांकि, सिगरेट के अधिकांश लोकप्रिय ब्रांड इस श्रेणी में नहीं आते हैं। चबाने वाले एवं जर्दा-युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पर क्रमशः 82 प्रतिशत एवं 91 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। एक फरवरी से सिगरेट, पान मसाला, सिगार, हुक्का, जर्दा एवं सुगंधित तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी जबकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू रहेगा।

वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा-युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण एवं शुल्क संग्रह) नियम, 2025 को भी अधिसूचित किया है। इस नियम के तहत संबंधित उत्पादों के विनिर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और फुटेज को न्यूनतम 24 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। विनिर्माताओं को मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी उत्पाद शुल्क अधिकारियों को देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिन या उससे अधिक समय तक बंद रहती है तो उस अवधि के लिए विनिर्माता उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक, सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य तंबाकू उत्पादों पर उनके गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ को सुनिश्चित करना और भारत की कर व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के करीब लाना है। भारत में जुलाई, 2017 में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद पिछले सात वर्षों से सिगरेट पर कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक, भारत में सिगरेट पर कुल कर भार खुदरा कीमत का करीब 53 प्रतिशत है, जो तंबाकू खपत में प्रभावी कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा सुझाए गए 75 प्रतिशत या उससे अधिक के मानक कर बोझ से काफी कम है। ब्रिटेन एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिगरेट पर कर भार 80-85 प्रतिशत से अधिक है जबकि न्यूजीलैंड, फ्रांस और कई यूरोपीय देशों में 75-80 प्रतिशत से ऊपर है।

पान मसाला पर उपकर और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर संसद ने पिछले महीने मंजूरी दे दी थी। जीएसटी परिषद ने पिछले वर्ष सितंबर में क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था समाप्त होने के बाद जीएसटी के ऊपर उपकर एवं उत्पाद शुल्क लगाने की व्यवस्था लाने का निर्णय लिया था। कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र द्वारा लिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के ऋण का भुगतान 31 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाना है।

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