डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों का जोखिम बढ़ा सकता है एआई: सीसीआई प्रमुख

डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों का जोखिम बढ़ा सकता है एआई: सीसीआई प्रमुख

डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों का जोखिम बढ़ा सकता है एआई: सीसीआई प्रमुख
Modified Date: September 7, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: September 7, 2026 4:52 pm IST

पणजी, सात सितंबर (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने सोमवार को आगाह किया कि कृत्रिम मेधा (एआई) को तेजी से अपनाए जाने से डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों का जोखिम बढ़ सकता है।

उन्होंने अपने ही उत्पादों को प्राथमिकता देने, भेदभावपूर्ण मूल्य-निर्धारण, उत्पादों या सेवाओं को एक साथ बेचने और बाजार में हेराफेरी जैसी गतिविधियों के संभावित इस्तेमाल से जुड़़ी आशंका भी जताई।

सीसीआई प्रमुख ने ‘इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च’ (आईआईयूएलईआर) में कानून के विद्यार्थियों के लिए आयोजित एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल बाजार पहले ही तेजी से बदल रहे थे, लेकिन एआई ने बदलाव की रफ्तार को और तेज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, लॉजिस्टिक और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन समेत विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार तेजी से एआई उपकरणों और अनुप्रयोगों को अपना रहे हैं। लेकिन प्रतिस्पर्धा नियामक को यह भी देखना होगा कि एआई का इस्तेमाल डिजिटल बाजारों में पहले से मौजूद प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों को दोहराने या बढ़ाने के लिए तो नहीं किया जा रहा है।

कौर ने कहा कि सीसीआई इस संभावना पर खास विचार कर रहा है कि एजेंटिक एआई बिना सीधे मानवीय हस्तक्षेप के ऐसी प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियां कर सकता है।

उन्होंने ऐसी स्थिति का उदाहरण दिया, जिसमें कोई एआई प्रणाली किसी प्रतिस्पर्धी की कीमत पर नजर रखकर उसके बराबर या उससे कम कीमत पर अपने उत्पाद की कीमत अपने आप तय कर सकती है।

उन्होंने कहा कि एआई और प्रतिस्पर्धा पर सीसीआई के अध्ययन में ये संभावित मुद्दे सामने आए हैं। आयोग ने पिछले साल इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किया था।

कौर ने कहा कि सीसीआई किसी नई प्रौद्योगिकी या बाजार में उभरती प्रवृत्ति के सामने आते ही तत्काल हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। बाजार अध्ययन उभरते मुद्दों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा कानून का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों को रोकना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बाजार प्रतिभागियों के लिए व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।

कौर ने स्पष्ट किया कि सीसीआई कंपनियों के बड़ा या प्रभावशाली बनने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें प्रभुत्व या वृद्धि से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन प्रभुत्व के दुरुपयोग की स्थिति में सीसीआई सख्ती से कार्रवाई करता है।”

उन्होंने कारोबार क्षेत्रों के लिए प्रतिस्पर्धा कानून के अनुपालन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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