(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने बृहस्पतिवार को कृत्रिम मेधा (एआई) को ‘‘तीव्र प्रगति’’ के युग की शुरुआत करने वाली प्रौद्योगिकी करार दिया जिसमें नई वैज्ञानिक खोजों को संभव बनाने एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विकास के पारंपरिक चरणों को पार करने में मदद करने की क्षमता है।
उन्होंने साथ ही कहा कि कृत्रिम मेधा जितना किसी भी प्रौद्योगिकी ने उन्हें “बड़े सपने देखने” के लिए प्रेरित नहीं किया।
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए गूगल एवं अल्फाबेट के सीईओ ने एआई के लिए एक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की, इसे ‘‘ हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा बदलाव’’ बताया और सरकारों, कंपनियों एवं संस्थानों से इस प्रौद्योगिकी को साहसपूर्वक एवं जिम्मेदारी से आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा वैश्विक बदलाव है। हम तीव्र प्रगति और नई खोजों के मुहाने पर हैं जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पुरानी कमियों को दूर करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि यह परिणाम न तो निश्चित है और न ही स्वचालित। ऐसी एआई बनाने के लिए जो वास्तव में सभी के लिए उपयोगी हो, हमें साहसपूर्वक प्रयास करना होगा, जिम्मेदारी से काम लेना होगा और इस निर्णायक क्षण में मिलकर काम करना होगा।’’
पिचाई ने कहा कि गूगल भारत में अपने पहले से घोषित 15 अरब अमेरिकी डॉलर के अवसंरचना निवेश के तहत आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्तरीय एआई केंद्र स्थापित कर रहा है। इस सुविधा में गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और एक नया अंतरराष्ट्रीय ‘सब सी केबल गेटवे‘’ होगा, जिसका उद्देश्य पूरे देश में रोजगार और एआई तक पहुंच का विस्तार करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘ प्रौद्योगिकी से अविश्वसनीय लाभ मिलते हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी को इनका लाभ मिले। हम डिजिटल विभाजन को एआई विभाजन में बदलने नहीं दे सकते। इसका मतलब है ‘कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर’ और संपर्क में निवेश करना।’’
उन्होंने विशाखापट्टनम में किए गए निवेश के साथ-साथ थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में किए गए निवेश का भी उदाहरण दिया।
पिचाई ने कहा कि एआई निस्संदेह कार्यबल को नया रूप देगा, कुछ भूमिकाओं को स्वचालित करेगा, कुछ को विकसित करेगा और पूरी तरह से नए रोजगर के अवसरों का सृजन करेगा। 20 साल पहले, पेशेवर ‘यूट्यूब क्रिएटर’ की अवधारणा मौजूद नहीं थी और आज दुनिया भर में लाखों ‘क्रिएटर’ हैं।
उन्होंने गूगल डीपमाइंड द्वारा विकसित अल्फाफोल्ड जैसी एआई की अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख किया जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इसने प्रोटीन संरचना अनुसंधान के दशकों को एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ‘डेटाबेस’ में सीमित कर दिया है जिसका उपयोग दुनिया भर के लाखों शोधकर्ता करते हैं।
प्रौद्योगिकी अपनाने में भरोसे को आधार बताते हुए पिचाई ने सरकार, कंपनियों और नवोन्मेषकों सहित सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि कृत्रिम मेधा के पूर्ण लाभ हासिल किए जा सकें।
उन्होंने कहा, “हमने ‘सिंथ आईडी’ जैसे उपकरण विकसित किए हैं, जिनका उपयोग दुनिया भर में पत्रकार और नागरिक तथ्य-जांचकर्ता सामग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के लिए करते हैं। चाहे हम कितने भी जिम्मेदार हों, यदि हम साथ मिलकर काम नहीं करेंगे तो कृत्रिम मेधा के पूर्ण लाभ हासिल नहीं कर पाएंगे।”
पिचाई ने कहा कि सरकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “इसमें नियामक के रूप में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय करना और प्रमुख जोखिमों का समाधान करना शामिल है। साथ ही नवोन्मेषक के रूप में भी, जहां कृत्रिम मेधा को सार्वजनिक सेवाओं में लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और लोगों व व्यवसायों के लिए इन प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने में मदद मिल सकती है।”
पिचाई ने कहा कि एआई अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है और विज्ञान की कुछ सबसे कठिन समस्याओं को हल कर सकता है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा