भारत में एआई निवेश एक साल में 119 प्रतिशत बढ़ा, सुरक्षित इस्तेमाल की तैयारी में पीछे

भारत में एआई निवेश एक साल में 119 प्रतिशत बढ़ा, सुरक्षित इस्तेमाल की तैयारी में पीछे

भारत में एआई निवेश एक साल में 119 प्रतिशत बढ़ा, सुरक्षित इस्तेमाल की तैयारी में पीछे
Modified Date: September 8, 2026 / 06:47 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:47 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) कंपनियों के कामकाज में इस्तेमाल होने वाली कृत्रिम मेधा (एआई) प्रौद्योगिकी में भारत में निवेश पिछले एक साल में 119 प्रतिशत बढ़ा गया जो वैश्विक औसत 110 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, केवल 22 प्रतिशत भारतीय संगठनों ने ही एआई के सुरक्षित और जवाबदेह इस्तेमाल के लिए जरूरी ढांचा तैयार किया है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

सर्विसनाउ की ‘उद्यम एआई परिपक्वता सूचकांक 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, एआई में तेजी से बढ़ते निवेश और इसके व्यापक एवं सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जरूरी ऑडिट, परीक्षण तथा जोखिम आकलन की व्यवस्थाओं के बीच फासला बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय संगठनों के औसत सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) बजट में एआई की हिस्सेदारी 2027 तक बढ़कर 21.3 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो फिलहाल 16.6 प्रतिशत है। इस अध्ययन में 4,500 वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया, जिनमें 350 भारत से थे।

हालांकि, एआई का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद इसके जरिये कामकाज को पूरी तरह स्वचालित करने की दिशा में प्रगति सीमित है। भारत में 54 प्रतिशत संगठन एआई एजेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन केवल 11 प्रतिशत ने ही एआई के जरिये लगातार मानवीय हस्तक्षेप के बिना काम पूरा करने की व्यवस्था अपनाई है।

सर्विसनाउ के भारत एवं दक्षेस खंड के प्रबंध निदेशक और समूह उपाध्यक्ष कुलमीत बावा ने कहा, ‘‘भारत ने एआई में बड़े पैमाने पर निवेश की क्षमता दिखाई है, लेकिन अगला चरण मजबूत नियमन एवं जवाबदेही की व्यवस्था, आपस में जुड़े डेटा और ऐसी कार्यप्रणालियों पर निर्भर करेगा, जिनसे एआई को अधिक महत्वपूर्ण काम सौंपे जा सकें।’’

अध्ययन में एआई अपनाने में पारदर्शिता और गलत सूचना को सबसे बड़ी चिंता बताया गया है। 60 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसे प्रमुख चुनौती माना। वहीं, 55 प्रतिशत ने नियामकीय एवं अनुपालन संबंधी जटिलताओं और 50 प्रतिशत ने डेटा की निजता एवं सुरक्षा को महत्वपूर्ण चिंता बताया।

बुनियादी ढांचा भी एक बड़ी बाधा है। भारत में केवल 18 प्रतिशत संगठनों ने अलग-अलग और पुरानी आईटी प्रणाली को हटाकर एकीकृत मंच अपनाए हैं।

इन चुनौतियों के चलते भारत में एआई के सुरक्षित और जवाबदेह इस्तेमाल की तैयारियों का स्कोर 100 में 55 रहा, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अग्रणी संगठनों का स्कोर 78 रहा। इन अग्रणी क्षेत्रीय संगठनों को एआई में किए गए निवेश पर फिलहाल 149 प्रतिशत का प्रतिफल मिल रहा है।

डेलॉयट इंडिया के साझेदार और मुख्य रणनीति एवं नवाचार अधिकारी अश्विन वेल्लोडी ने कहा कि भारत में एआई परिपक्वता नए चरण में पहुंच रही है। संगठनों को बड़े स्तर पर एआई अपनाने के लिए डेटा, प्रतिभा, कामकाज के संचालन और जवाबदेही जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर समान ध्यान देना होगा।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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