ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली के लक्जरी होटल में कमरों की भारी किल्लत, किराये में भारी उछाल

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली के लक्जरी होटल में कमरों की भारी किल्लत, किराये में भारी उछाल

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली के लक्जरी होटल में कमरों की भारी किल्लत, किराये में भारी उछाल
Modified Date: September 8, 2026 / 06:40 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:40 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली के लक्जरी होटल में कमरों की भारी कमी और किराये में तेज उछाल देखा जा रहा है। कई प्रमुख होटल में 12-13 सितंबर के आयोजन के आसपास कमरे उपलब्ध नहीं हैं या प्रति रात का किराया छह अंक (लाखों रुपये) में बताया जा रहा है।

होटल बुकिंग मंचों की पड़ताल से पता चला कि नयी दिल्ली के ताज महल और द ओबेरॉय में 11-12 सितंबर के लिए कमरे उपलब्ध नहीं हैं, जबकि शहर के ताज पैलेस में 10-12 सितंबर के लिए कोई कमरा उपलब्ध नहीं था। द लीला पैलेस, नयी दिल्ली 10-12 सितंबर के लिए बुकिंग स्वीकार नहीं कर रहा था।

आईटीसी मौर्य, नयी दिल्ली जैसी संपत्तियों में 10-13 सितंबर के लिए उपलब्ध कमरों के लिए असाधारण रूप से ऊंचा किराया मांगा जा रहा है, जिसमें रात भर ठहरने की शुरुआती कीमत 2.3 लाख रुपये से अधिक है।

होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) के अध्यक्ष के बी काचरू ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”भारत एक निर्णायक मोड़ पर दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है – जैसे-जैसे देश प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने और एक प्रमुख एमआईसीई (बैठक, प्रोत्साहन, सम्मेलन और प्रदर्शनियां) गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहा है, दुनिया यह देख रही है कि हम अपने पर्यटन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किस तरह विस्तार करते हैं।”

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कमरों की उपलब्धता पर काफी ध्यान जाएगा और यह स्थिति एक कड़वी सच्चाई को सामने ला रही है कि हमारा आतिथ्य बुनियादी ढांचा हमारी पर्यटन महत्वाकांक्षा के साथ तालमेल नहीं बैठा पाया है।’’

काचरू ने कहा कि भारत में इस समय ब्रांडेड होटल के लगभग दो-सवा दो लाख कमरे हैं, जो हमारे आकार तथा आकांक्षा वाले देश के लिए बहुत कम है।

कई प्रतिनिधि और अन्य आगंतुक शिखर सम्मेलन से पहले ही पहुंच रहे हैं और अपने प्रवास को बढ़ा रहे हैं, जिससे मध्य दिल्ली में कमरों की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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