नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने मंगलवार को कृषि क्षेत्र में सूचना के अंतर को पाटने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों को किसानों से जोड़ने वाली व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और पूरा ध्यान किसानों को वास्तव में आवश्यक परामर्श सहायता प्रदान करने के बजाय कच्चा माल पहुंचाने पर केंद्रित हो गया है।
कृष्णन ने बताया कि वह स्वयं पंजीकृत किसान है और उन्होंने कृषि ऋण लिया हुआ है तथा उनकी मां खेती-बाड़ी का काम देखती है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए समय पर और विश्वसनीय सलाह सबसे महत्वपूर्ण चीज है और यही वह चीज है जिसे देने में व्यवस्था लगातार विफल रही है।
सचिव ने यहां एआई शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘किसान होने के नाते, वह हमेशा समय पर सलाह चाहते हैं। और कई लोग कहते हैं कि शोध संस्थानों को किसानों से जोड़ने वाली पुराना विस्तार नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। …कई कृषि विभागों और राज्य सरकारों में, कच्चे माल को पहुंचाने पर कहीं अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है। किसानों को वास्तव में किस तरह की सलाह चाहिए, इस पर कम ध्यान दिया जाता है।’’
उन्होंने कहा कि किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है और अक्सर वे उन कच्चे माल और सलाह के लिए भुगतान करने को तैयार रहते हैं जिनका महत्व समझते हैं।
सचिव ने कहा कि सब्सिडी वाले कच्चे माल को अक्सर ‘कृतज्ञता के बजाय संदेह’ के साथ स्वीकार किया जाता है, एक ऐसी वास्तविकता जिसे ‘बहुत कम लोग समझते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘‘सूचना विषमता को दूर करना, सलाह देने वाले प्रशिक्षिण पेशेवरों की दक्षता बढ़ाना या इस तरह की सलाह को वास्तविक समय में उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना, ये वे बड़े प्रभाव हैं जो एआई डाल सकता है।’’
कृष्णन ने ऋण तक पहुंच के बारे में गांवों में विसंगति का जिक्र किया, जहां छोटे किसानों को ऋण लेने के लिए कानूनी रूप से कुछ गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है, फिर भी उनसे नियमित रूप से ऐसा करने के लिए कहा जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर एग्रीस्टैक (कृषि के लिए एकीकृत डिजिटल बुनियादी ढांचा) इस समस्या का समाधान कर सकता है, तो यह एक क्रांतिकारी कदम होगा।’’
स्त्री-पुरुष समानता के क्षेत्र में एआई की भूमिका पर कृष्णन ने कहा कि इस तकनीक को महिलाओं को सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी होने चाहिए।
क्षेत्र-विशेष अनुप्रयोगों से हटकर, उन्होंने कहा कि एआई की असली परीक्षा यह नहीं होगी कि वह कृत्रिम मेधा या अतिमेधा हासिल करती है या नहीं, बल्कि यह होगी कि क्या वह उन क्षेत्रों में मापने योग्य लाभ प्रदान करती है जहां राज्य लंबे समय से पिछड़ा रहा है।
सचिव ने कहा, ‘‘अंततः, यदि एआई को एक प्रौद्योगिकी के रूप में प्रभाव डालना है, तो उसे वास्तविक दुनिया के क्षेत्रों में प्रभाव डालना होगा। चाहे वह कृषि हो, विनिर्माण हो, स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा हो, संचालन हो, इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में, हमें वास्तव में इसका प्रभाव देखने की आवश्यकता है।’’
कृष्णन ने कहा, ‘‘उत्पादकता में सार्थक वृद्धि लाने या लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने वाली सेवाएं प्रदान करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। इन मामलों में एआई महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।’’
भाषा रमण अजय
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