India Trade Deficit: सोने-चांदी ने बिगाड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था का खेल! इतना बढ़ गया व्यापार घाटा, जानिए किस पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

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सोने-चांदी ने बिगाड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था का खेल! इतना बढ़ गया व्यापार घाटा, India Trade Deficit Increased Due to Gold Silver

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 05:57 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 05:57 PM IST

नई दिल्ली। India Trade Deficit: भारत का व्यापारिक घाटा जनवरी 2026 में तेज़ी से बढ़कर 35 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो दिसंबर में 24 अरब डॉलर था। घाटे में यह उछाल मुख्य रूप से सोने और चांदी के आयात में भारी वृद्धि तथा अमेरिका को निर्यात में 23 प्रतिशत की गिरावट के कारण दर्ज किया गया। जनवरी माह में माल निर्यात लगभग स्थिर रहा और 35.56 अरब डॉलर पर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि है। इसके विपरीत, आयात में 19 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई। अमेरिका से आयातित माल में 24 प्रतिशत की वृद्धि ने कुल आयात को ऊपर धकेला। बता दें कि जनवरी में सोने का आयात 350 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 2.66 अरब डॉलर था। यह उछाल व्यापार घाटे को बढ़ाने वाला प्रमुख कारक रहा।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में सोने का आयात 32.9 अरब डॉलर था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 58.0 अरब डॉलर हो गया है। यानी छह वर्षों में 76 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि, इस अवधि में सोने की आयातित मात्रा 982.7 टन से घटकर 757.1 टन रह गई, जो 23 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। इससे संकेत मिलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात बिल बढ़ा है।

कुल व्यापार घाटा भी दोगुना

India Trade Deficit: वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर भारत का कुल व्यापार घाटा जनवरी 2026 में बढ़कर 10.38 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष जनवरी के 5.39 अरब डॉलर से लगभग दोगुना है। जनवरी 2026 में वस्तुओं और सेवाओं का संयुक्त निर्यात 80.45 अरब डॉलर रहा, जो जनवरी 2025 के 71.09 अरब डॉलर से 13.16 प्रतिशत अधिक है।

चालू वित्त वर्ष के आंकड़े

चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों (अप्रैल-जनवरी) में भारत का कुल निर्यात 720 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 823 अरब डॉलर रहा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, “इस वर्ष हमें वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में 860 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। सेवाओं के क्षेत्र में 2025-26 में 410 अरब डॉलर का लक्ष्य पार होने की संभावना है।”

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