Raipur Work From Home Scam : दीवारों पर चिपके इन पोस्टर्स से रहें दूर! वर्क फ्रॉम होम के नाम पर राजधानी में युवाओं के साथ हो रहा बड़ा कांड

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Raipur में वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 74 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की जा चुकी है। बेरोजगार युवाओं को फर्जी जॉब ऑफर देकर सिक्योरिटी मनी और ओटीपी के जरिए उनके खातों से रकम उड़ाई गई।

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 05:47 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 05:49 PM IST

Raipur Work From Home Scam / Image Source : IBC24

HIGHLIGHTS
  • वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 74 लाख से ज्यादा की ठगी।
  • फर्जी पोस्टर और टेलीकॉम कंपनी के नाम का इस्तेमाल।
  • पुलिस ने राजस्थान से आरोपियों को गिरफ्तार किया।

रायपुर : Raipur Work From Home Scam  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी का एक बड़ा जाल फैला हुआ है, जिसमें अब तक 74 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी हो चुकी है। ठगों ने शहर भर में लुभावने पोस्टर्स लगाकर बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाया है। इसी झांसे में आकर राखी थाना इलाके के पारस कुमार ने 24 लाख रुपये और धरसीवा के ललित साहू ने 34 लाख रुपये गंवा दिए। कोरोना काल के बाद से ‘वर्क फ्रॉम होम’ शब्द ठगों के लिए पैसा हड़पने का एक नया हथियार बन गया है।

कैसे काम करता है यह मायाजाल ?

ठगी का यह नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम करता है। ये लोग सरकारी दफ्तरों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के बाहर आकर्षक पोस्टर्स लगाते हैं और अखबारों में विज्ञापन भी देते हैं। Raipur Fraud News जब कोई जरूरतमंद कॉल करता है, तो उसे देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों जैसे रिलायंस जियो का कर्मचारी बनकर झांसा दिया जाता है। शुरुआत में डॉक्यूमेंट्स मांगे जाते हैं और फिर ‘सिक्योरिटी मनी’ के नाम पर 1500 से 2000 रुपये जमा करवाए जाते हैं। एक बार जाल में फंसने के बाद, वे ओटीपी, यूपीआई और बाहरी एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करवाकर खातों से लाखों रुपये साफ कर देते हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और बचाव

रायपुर पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए राजस्थान के पाली और अजमेर से शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गैंग पूरे प्रदेश में सक्रिय है। पुलिस ने युवाओं को आगाह किया है कि असली नौकरी देने वाली कंपनियां कभी भी पैसों की मांग नहीं करतीं। किसी भी अनजान लिंक या क्यूआर कोड को साझा न करें और हमेशा आधिकारिक स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें। सवाल अब भी बरकरार है कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाने वालों पर पहले ही सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

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ठगी कैसे की जा रही थी?

फर्जी जॉब ऑफर देकर पहले सिक्योरिटी मनी ली जाती थी, फिर ओटीपी और फर्जी ऐप के जरिए बैंक खातों से पैसे निकाल लिए जाते थे।

किन लोगों को निशाना बनाया गया?

मुख्य रूप से बेरोजगार युवाओं को वर्क फ्रॉम होम के झांसे में फंसाया गया।

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पुलिस ने राजस्थान के पाली और अजमेर से आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।