नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) एयर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन ने कहा कि हवाई क्षेत्र से जुड़ी बाधाओं के कारण कुछ मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम करने या सेवाएं निलंबित करने पर विचार किया जाएगा। इसका कारण कई उड़ानें अब पहले की तरह लाभदायक नहीं रहीं या घाटे में चल रही हैं।
कर्मचारियों के लिए शुक्रवार को आयोजित बैठक में एयरलाइन ने लागत कम करने के कई उपायों की घोषणा की, जिनमें वार्षिक वेतनवृद्धि को कुछ समय के लिए स्थगित करना और कर्मचारियों से गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील शामिल है।
विल्सन ने कहा, “हम उन सभी कदमों को जारी रखेंगे जो राजस्व बढ़ाने और लागत कम करने में मदद करेंगे।”
एयर इंडिया के पास वर्तमान में लगभग 190 विमान हैं और कंपनी हर सप्ताह करीब 8,000 उड़ानें संचालित करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयरलाइन ने लगभग 6.2 करोड़ यात्रियों को सेवा दी।
उन्होंने कहा कि हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण कुछ मार्ग अब उतने लाभदायक नहीं रहे या घाटे में हैं, इसलिए वहां संचालन घटाना पड़ेगा।
विल्सन ने कहा कि कुछ मामलों में उड़ानों की आवृत्ति कम की जाएगी और कुछ मार्गों पर पूरी तरह से सेवाएं रोकनी पड़ सकती हैं। परिस्थितियां बदलने पर इन मार्गों पर दोबारा सेवाएं शुरू की जा सकती हैं, लेकिन नेटवर्क को परिस्थितियों के अनुसार लचीला रखना जरूरी है।
पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने और पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते बढ़ी विमान ईंधन कीमतों ने एयर इंडिया की परिचालन लागत बढ़ा दी है। एयरलाइन पहले से ही एक बड़े बदलाव कार्यक्रम को लागू कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि विमान ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि, हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों और लंबी उड़ान अवधि के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अब लाभकारी नहीं रह गई हैं।
एयरलाइन ने अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती शुरू की थी, जो मई में भी जारी है और अब जून तथा जुलाई के लिए उड़ान कार्यक्रम में और कटौती की संभावना जताई गई है।
भाषा योगेश रमण
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