पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील पुराने अधिनियम के तहत होगी संचालित: आयकर विभाग

पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील पुराने अधिनियम के तहत होगी संचालित: आयकर विभाग

पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील पुराने अधिनियम के तहत होगी संचालित: आयकर विभाग
Modified Date: March 23, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: March 23, 2026 8:20 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) आयकर विभाग ने सोमवार को कहा कि उसका ई-फाइलिंग पोर्टल पुराने और नये आयकर अधिनियमों के अनुपालन में सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील और अन्य कार्यवाही उनके अंतिम निपटान तक पुराने अधिनियम के तहत ही संचालित होंगी।

आयकर विभाग ने नये आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से कुछ दिन पहले बार-बार पूछे जाने वाले सवालों की सूची (एफएक्यू) जारी करते हुए कहा कि जो करदाता जुलाई, 2026 में आकलन वर्ष 2026-27 (पुराने अधिनियम के तहत संचालित अवधि से संबंधित) के लिए रिटर्न दाखिल कर रहे हैं, वे पुराने अधिनियम के तहत निर्धारित प्रपत्रों का उपयोग करेंगे।

साथ ही, कर वर्ष 2026-27 के लिए जून, 2026 से शुरू होने वाले अग्रिम कर भुगतान नये अधिनियम के अनुसार किए जाएंगे।

नया आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। यह छह दशक पुराने कानून का स्थान लेगा। यह कानून कर नियमों को सरल बनाता है, कानूनी विवाद को कम करता है, एक ही कर वर्ष प्रणाली लागू करता है और रिटर्न फॉर्म को नया रूप देकर अनुपालन को आसान बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में कहा गया है कि एक अप्रैल, 2026 से 1961 का अधिनियम निरस्त हो जाएगा। हालांकि, इसके प्रावधान एक अप्रैल, 2026 से पहले के सभी कर वर्षों पर लागू रहेंगे।

इसमें कहा गया, ‘‘आयकर विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल पुराने और नये दोनों अधिनियमों के तहत एक साथ अनुपालन की सुविधा प्रदान करेगा। पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील और अन्य कार्यवाही उनके अंतिम निर्णय तक पुराने अधिनियम के तहत ही संचालित होंगी।’’

एफएक्यू के अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय लागू कर रही है कि आयकर पोर्टल पर दोनों विधायी रूपरेखा सुचारू रूप से और एक साथ काम करें।

आयकर अधिनियम, 2025, में आकलन वर्ष और पिछले वर्ष के बीच के अंतर को समाप्त कर कर समयसीमा को सरल बना गया है और इसे एक ही ‘कर वर्ष’ रूपरेखा से प्रतिस्थापित किया गया है। यह करदाताओं को बिना किसी जुर्माने के, समयसीमा के बाद भी आयकर रिटर्न दाखिल करने पर भी टीडीएस वापसी का दावा करने की अनुमति देता है।

एफएक्यू में यह भी कहा गया है कि यदि आकलन अधिकारी ने नये अधिनियम के लागू होने से पहले आकलन वर्ष 2024-25 के लिए करदाता की आय का आकलन शुरू किया था, तो पूरा आकलन और अन्य कार्यवाही पुराने अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही पूरी की जाएगी।

इसमें यह भी कहा गया है कि टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती), टीसीएस (स्रोत पर कर संग्रह), अग्रिम कर भुगतान आदि जैसे अनुपालन, जो वित्त वर्ष के भीतर होते हैं, जबकि रिटर्न दाखिल करना, आकलन, पुन:आकलन, अपील, जुर्माना और रिफंड जैसी प्रक्रियाएं प्राय: वर्ष से आगे तक जाती हैं जबकि कुछ मामलों में कई वर्षों तक भी चलती रहती हैं।

एफएक्यू के अनुसार, ‘‘इसलिए, जब कोई नया कर कानून लागू होता है, तो बदलाव अवधि के लिए पुराने और नये कानूनों का साथ-साथ चलना आवश्यक होता है। आयकर अधिनियम, 2025, इस व्यावहारिक वास्तविकता को स्वीकार करता है और धारा 536, निरसन और बचत खंड के माध्यम से बदलाव अवधि के दौरान व्यवस्था को सुगम बनाता है।’’

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536 में 22 उप-खंड हैं जो विभिन्न संक्रमणकालीन स्थितियों का समाधान करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि पुराने कर ढांचे पिछले वर्षों पर लागू होते रहें। यह दोनों अधिनियमों के बीच शब्दावली को भी उसके अनुरूप बनाता है और स्थापित व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बिना कानून को आधुनिक बनाने की अनुमति देता है।

आयकर विभाग के एफएक्यू में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अर्जित आय आयकर अधिनियम, 1961 द्वारा शासित होगी और आकलन वर्ष 2026-27 में उसका आकलन किया जाएगा। एक अप्रैल, 2026 से अर्जित आय आयकर अधिनियम, 2025 द्वारा शासित होगी और कर वर्ष 2026-27 और उसके बाद के वर्षों के लिए उसका आकलन किया जाएगा।

भाषा रमण अजय

अजय


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