ट्रंप शुल्क के रूप में वसूले गए 133 अरब डॉलर के रिफंड को लेकर अस्पष्टता कायम

ट्रंप शुल्क के रूप में वसूले गए 133 अरब डॉलर के रिफंड को लेकर अस्पष्टता कायम

ट्रंप शुल्क के रूप में वसूले गए 133 अरब डॉलर के रिफंड को लेकर अस्पष्टता कायम
Modified Date: February 21, 2026 / 01:51 pm IST
Published Date: February 21, 2026 1:51 pm IST

वाशिंगटन, 21 फरवरी (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए व्यापक शुल्कों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से अवैध करार दिए जाने के बाद इन सीमा शुल्कों के रूप में संग्रहीत 133 अरब डॉलर की राशि को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं हो पाई है।

कंपनियां इस शुल्क राशि का रिफंड पाने के लिए कतार में लग गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी राह जटिल और लंबी हो सकती है।

व्यापार कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी आयातक सीमा शु्ल्क के रूप में चुकाई गई राशि को आखिरकार वापस पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजरना पड़ सकता है।

विंसन एंड एल्किन्स लॉ फर्म में साझेदार और व्यापार वकील जॉयस अडेतुतू ने कहा, ‘कुछ समय के लिए यह एक ऊबड़-खाबड़ रास्ते से भरा सफर होने वाला है।’

क्लार्क हिल फर्म के अधिवक्ताओं का कहना है कि अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी और सीमा सुरक्षा एजेंसी, न्यूयॉर्क के अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेष न्यायालय और अन्य निचली अदालतों की प्रक्रिया के कारण रिफंड मिलने में समय लग सकता है।

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा कि ट्रंप का आपातकालीन शक्तियों के कानून (आईईपीए, 1977) के जरिए दूसरे देशों पर आयात शुल्क लगाने का कदम वैध नहीं था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति के पास आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं था।

अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने दिसंबर तक आईईपीए के तहत जारी शुल्क आदेशों के तहत कुल 133 अरब डॉलर वसूल किए हैं।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस शुल्क राशि का रिफंड आयातकों को भले ही मिल जाए लेकिन आम लोगों को यह रिफंड मिलना बहुत मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों ने बढ़े हुए शुल्क का बोझ कीमत वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं पर डाल दिया था।

न्यायाधीश ब्रेट कवानॉ ने बहुमत के फैसले से अलग राय देते हुए कहा है कि न्यायालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार को अब रिफंड की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ानी चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि आयातकों से वसूले गए कर की रिफंड प्रक्रिया बहुत जटिल हो सकती है।

एपी योगेश प्रेम

प्रेम


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