आंध्र उच्च न्यायालय में शिरडी साई ट्रांसफॉर्मर्स खरीद में अनियमितता को लेकर जनहित याचिका स्वीकार

Ads

आंध्र उच्च न्यायालय में शिरडी साई ट्रांसफॉर्मर्स खरीद में अनियमितता को लेकर जनहित याचिका स्वीकार

  •  
  • Publish Date - March 18, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 07:33 PM IST

अमरावती, 18 मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा शिरडी साई ट्रांसफॉर्मर्स से जुड़े वितरण ट्रांसफॉर्मर की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) स्वीकार कर ली है।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी ए.बी. वेंकटेश्वर राव की इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि खेतों में बिजली कनेक्शन देने के लिए 25 केवीए (किलोवोल्ट एम्पीयर) क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर की खरीद में भारी घपला किया गया है। याचिका के अनुसार, इस प्रक्रिया में न केवल दामों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, बल्कि जानबूझकर प्रतिस्पर्धा खत्म की गई और चहेती कंपनियों को ठेके देने में जमकर अनियमितताएं बरती गईं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि ट्रांसफॉर्मर की तकनीकी खूबियों में कोई बदलाव न होने के बावजूद उनकी खरीद कीमतों में अकारण भारी बढ़ोतरी की गई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में जो कीमत लगभग 54,278 रुपये प्रति इकाई (यूनिट) थी, वह अब बढ़कर लगभग 1.39 लाख रुपये हो गई है, जो सीधे तौर पर 157 प्रतिशत की वृद्धि है।

जनहित याचिका में पड़ोसी राज्यों की कीमतों के साथ भारी अंतर का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, तेलंगाना की बिजली वितरण कंपनियों ने ठीक इसी प्रकार के ट्रांसफॉर्मर काफी कम दरों पर खरीदे थे, जिनकी कीमत 66,609 रुपये से 88,210 रुपये प्रति इकाई के बीच रही थी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी निविदा प्रक्रिया को इस तरह से घुमाया गया कि ‘शिरडी साई ट्रांसफॉर्मर्स’ नामक एक ही विक्रेता को ऊंची दरों पर हजारों ट्रांसफॉर्मर के ऑर्डर मिलें, जिससे सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा।

याचिका के अनुसार, पात्रता की शर्तों को जानबूझकर किसी खास को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह तैयार किया गया था कि अन्य योग्य बोलीदाता दौड़ से बाहर हो जाएं और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो जाए।

भाषा सुमित अजय

अजय