समर्थन मूल्य पर कपास खरीद के लिए सीसीआई को 1,718.56 करोड़ रुपये के वित्तपोषण को मंजूरी

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समर्थन मूल्य पर कपास खरीद के लिए सीसीआई को 1,718.56 करोड़ रुपये के वित्तपोषण को मंजूरी

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 08:12 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 08:12 PM IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) सरकार ने बुधवार को भारतीय कपास निगम को 2023-24 के कपास सत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद व्यवस्था के तहत दिये गये मूल्य समर्थन को लेकर 1,718.56 करोड़ रुपये दिये जाने की मंजूरी दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि सत्र के दौरान कपास के बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिरने के कारण, सरकारी एजेंसी को 32.84 लाख गांठ के लिए एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था करनी पड़ी। इससे लगभग 7.25 लाख किसानों को लाभ हुआ और लगभग 11,712 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में जमा किए गए।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने कपास सत्र 2023-24 (एक अक्टूबर, 2023 से 30 सितंबर, 2024) के दौरान कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संचालन के तहत दिए गए मूल्य समर्थन की प्रतिपूर्ति के लिए व्यय को मंजूरी दी।

आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘किसानों के कल्याण को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सीसीईए ने कपास सत्र 2023-24 के लिए भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को न्यूनतम समर्थन मूल्य के वित्तपोषण के रूप में 1,718.56 करोड़ रुपये की राशि की मंजूरी दी है।’’

केंद्र सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करती है। केंद्र ने कपास में एमएसपी के लिए सीसीआई को केंद्रीय नोडल एजेंसी बनाया है।

बाजार मूल्य जब भी एमएसपी स्तर से नीचे गिरता है, कपास निगम किसानों से बिना किसी सीमा के स्वीकृत मानकों वाले कपास की खरीद करता है।

कपास सत्र 2023-24 के दौरान, कुल रकबा 114.47 लाख हेक्टेयर अनुमानित था, जिसमें उत्पादन 325.22 लाख गांठ था। यह वैश्विक कपास उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत बैठता है।

सीसीआई ने सभी 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में एक मजबूत खरीद नेटवर्क स्थापित किया है। इसमें 152 जिलों में 508 से अधिक खरीद केंद्र कार्यरत हैं, जो किसानों के लिए सुगम और सुलभ खरीद सुनिश्चित करते हैं।

बयान में कहा गया, ‘‘कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। यह लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का साधन है। साथ ही प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र सहित संबद्ध गतिविधियों में लगे चार से पांच करोड़ लोगों को इससे मदद मिल रही है।’’

भाषा रमण अजय

अजय