नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने गुजरात हाइड्रोकार्बन्स एंड पावर एसईजेड लिमिटेड (जीएचपीएसएल) के लिए जावेरी समूह की समाधान योजना रद्द करते हुए दिवाला समाधान प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने का आदेश दिया है।
अपीलीय न्यायाधिकरण की दो-सदस्यीय पीठ ने कहा कि जावेरी एंड कंपनी की बोली इस अप्रमाणित और विवादित धारणा पर आधारित थी कि जीएचपीएसएल की जमीन को विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के दर्जे से बाहर कर दिया जाएगा।
एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की दिल्ली पीठ के आदेश को रद्द करते हुए समाधान पेशेवर को नए सिरे से रुचि पत्र आमंत्रित करने और नया फॉर्म ‘जी’ जारी करने का निर्देश दिया। इसके लिए सही और पूरी जानकारी वाला नया सूचना ज्ञापन तैयार किया जाएगा।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने 31 अगस्त के 84 पृष्ठों के आदेश में कहा कि जावेरी की योजना जमीन का एसईजेड दर्जा समाप्त होने की धारणा पर आधारित थी, जबकि इसके लिए जमीन की पट्टेदार गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीआईडीसी) की सहमति और विकास आयुक्त का प्रमाणपत्र नहीं था। लिहाजा, योजना व्यवहारिक नहीं थी।
पीठ ने यह भी कहा कि बोली के लिए इस्तेमाल सूचना ज्ञापन में श्रेई इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड के दावे को बढ़ाकर बताया गया था, कॉरपोरेट गारंटर असम कंपनी इंडिया लिमिटेड (एसीआईएल) की स्थिति गलत बताई गई थी और एसईजेड दर्जा समाप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई थी।
जीएचपीएसएल को अगस्त 2007 में गुजरात के भरूच जिले के विलायत में 450 हेक्टेयर जमीन पर तेल, गैस, ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों के लिए एसईजेड विकसित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया 18 नवंबर, 2020 को शुरू हुई थी। एनसीएलटी ने श्रेई इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस की 100 करोड़ रुपये की ऋण चूक के मामले में आईबीसी की धारा सात के तहत दायर याचिका स्वीकार की थी।
एनसीएलटी ने 19 फरवरी, 2025 को जावेरी की 135 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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