मुंबई, चार सितंबर (भाषा) बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने शुक्रवार को भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच कारोबार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न वस्तुओं पर आयात शुल्क को और घटाकर शून्य करने की संभावना पर विचार करने की वकालत की। उन्होंने हीरा क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
भारत यात्रा पर आए डी वेवर ने यहां ‘भारत डायमंड बोर्स’ (बीडीबी) में अपने संबोधन में कहा कि भारत और 27 सदस्य देशों वाले समूह ईयू को जनवरी में हुए ‘ऐतिहासिक’ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) तक पहुंचने में दो दशक लगे।
इस समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले साल इसके लागू होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘एफटीए भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले पॉलिश हीरों समेत सभी तरह के उत्पादों पर मौजूदा आयात शुल्क में काफी कमी करता है। और मैं समझता हूं कि शुल्क को और कम करने या यहां तक कि शून्य करने पर भी चर्चा की मंशा है। हम निश्चित रूप से इस पहल का स्वागत करेंगे, इसका समर्थन करेंगे और इसे आगे बढ़ाएंगे।’
उन्होंने कहा कि वह भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार को यथासंभव सुगम बनाना चाहते हैं। उन्होंने हीरे के साथ-साथ विभिन्न अन्य उत्पादों और क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने की काफी संभावनाएं बताईं।
डी वेवर ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि दोनों दिशाओं में हमारे बीच आयात शुल्क को जितना संभव हो सके, उतना कम किया जाए। क्योंकि बेल्जियम और एंटवर्प कारोबार के लिए हमेशा खुले रहेंगे, खासकर हीरों तथा लोगों के लिए।’
उन्होंने कहा, ‘हमारा व्यापार दोनों दिशाओं में होता है और दोनों साझेदारों को लाभ पहुंचाता है। इसलिए यह कम से कम अगले 100 वर्षों तक निश्चित रूप से फलता-फूलता रहेगा।’
इस अवसर पर बीडीबी के अध्यक्ष अनूप मेहता ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापारिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं। गुजरात समेत भारत के कई हीरा कारोबारी बेल्जियम के प्रमुख हीरा व्यापार केंद्र एंटवर्प को अपना घर बना चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘दुनिया तेजी से बदल रही है और हमारे उद्योग को साझेदारी में इसके अनुरूप ढलना होगा। हमारा साझा उद्देश्य ऐसा हीरा कारोबार तैयार करना होना चाहिए जो न केवल समृद्ध हो, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और टिकाऊ भी हो।’
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि भारत-बेल्जियम के बीच रत्न एवं आभूषण कारोबार 2025-26 में करीब 3.5 अरब डॉलर का था। भारत में तराशे और पॉलिश किए जाने वाले करोड़ों हीरों में से कई का कारोबार एंटवर्प के जरिये होता है।
उन्होंने कहा, ‘ये केवल आंकड़े नहीं हैं। ये कारोबार, आजीविका और भारत में परिवारों को सहारा देने वाले 50 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इस वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़े हैं।’
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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