नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने बिजली के स्वच्छ स्रोतों के उपयोग और उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए भविष्य की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ऊर्जा भंडारण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव दिया है।
सीईए ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (विद्युत संयंत्रों और विद्युत लाइन के निर्माण के लिए तकनीकी मानक) दूसरा संशोधन विनियमन, 2026 का मसौदा प्रकाशित किया।
प्राधिकरण ने हितधारकों और आम जनता से चार अक्टूबर, 2026 तक प्रतिक्रिया मांगी है। प्रतिक्रिया और अन्य सुझावों के आधार पर संशोधनों को अंतिम रूप देने के बाद, इस प्रस्ताव को सीईए द्वारा अधिसूचित और लागू किया जाएगा।
संशोधनों में प्रावधान किया गया है कि एक जुलाई, 2027 के बाद चालू होने वाले नवीकरणीय ऊर्जा बिजली संयंत्रों में ग्रिड-फॉर्मिंग नियंत्रण वाले कम से कम 15 प्रतिशत इन्वर्टर होने चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि एक जुलाई, 2027 के बाद चालू होने वाले जमीन पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र और तटीय पवन ऊर्जा संयंत्र न्यूनतम दो घंटे की भंडारण अवधि और संयंत्र की स्थापित क्षमता के कम से कम 10 प्रतिशत के बराबर क्षमता वाले ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) से लैस होने चाहिए।
उदाहरण के लिए यदि सौर संयंत्र 100 मेगावाट का है, तो न्यूनतम भंडारण आवश्यकता दो घंटे के लिए 10 मेगावाट होगी।
यह कदम 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा हासिल करने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाषा पाण्डेय रमण
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