कृत्रिम मेधा से 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा भारत : प्रधान
कृत्रिम मेधा से 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा भारत : प्रधान
नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं से कृत्रिम मेधा (एआई) की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने का मंगलवार को आह्वान करते हुए कहा कि यह प्रौद्योगिकी ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
प्रधान ने यहां ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए नयी पीढ़ी से कहा कि वे कृत्रिम मेधा के इस्तेमाल को बढ़ाएं, एक साथ काम करने की भावना को मजबूत करें और इस प्रौद्योगिकी से उत्पन्न होने वाली व्यापक संभावनाओं का पता लगाएं।
प्रधान ने कहा कि भारत के बहुआयामी, बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी स्वरूप के साथ-साथ उसकी समृद्ध विरासत एवं इतिहास को देखते हुए कृत्रिम मेधा देश के लिए एक बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा कि जटिलताओं को समझने और उनसे निपटने में कृत्रिम मेधा एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।
मंत्री ने कहा, ‘‘ कृत्रिम मेधा हमें एक महत्वपूर्ण अवसर दे रही है। हमारा समाज बहुआयामी, बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी है जिसकी समृद्ध विरासत एवं इतिहास है…। इसकी जटिलताओं और बहुआयामिता को समझने में कृत्रिम मेधा अहम साधन बन सकती है। ’’
मंत्री ने युवाओं से कृत्रिम मेधा की गहरी समझ विकसित करने और इससे मिलने वाले व्यापक अवसरों को अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि इससे डरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘ डरने की कोई वजह नहीं है। विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और बड़ी कंपनियां मिलकर एक बड़ा दृष्टिकोण तैयार करें। आने वाले समय में युवाओं के नेतृत्व में भारत कृत्रिम मेधा आधारित वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।’’
प्रधान ने कहा कि देश ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सामूहिक लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लिया है और देश को विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने की इस यात्रा में कृत्रिम मेधा प्रमुख भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा सामूहिक लक्ष्य है कि 2047 तक भारत, विकसित राष्ट्र या विकसित अर्थव्यवस्था बने और इस दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता कृत्रिम मेधा से होकर ही गुजरता है।’’
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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