मुंबई रेलवे विकास निगम की अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने को मंजूरी
मुंबई रेलवे विकास निगम की अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने को मंजूरी
मुंबई, 28 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मुंबई रेलवे विकास निगम लि. (एमआरवीसी) की कार्यशील पूंजी को मजबूत करने के लिए उसकी अधिकृत शेयर पूंजी को 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दे दी।
राज्य मंत्रिमंडल ने एमआरवीसी की चुकता शेयर पूंजी को भी 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही कंपनी में बढ़ी हुई चुकता पूंजी में महाराष्ट्र सरकार के हिस्से के रूप में 98 करोड़ रुपये के योगदान को भी मंजूरी दी गई है।
एमआरवीसी की स्थापना वर्ष 1999 में हुई थी। कंपनी में केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार की हिस्सेदारी क्रमशः 51:49 अनुपात में है।
यह सार्वजनिक उपक्रम मुंबई शहरी परिवहन परियोजना के तहत उपनगरीय रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास, नेटवर्क क्षमता बढ़ाने, सुविधाओं के आधुनिकीकरण और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्य करता है।
राज्य सरकार ने कहा कि एमआरवीसी को सौंपी जा रही परियोजनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उसकी कार्यशील पूंजी को मजबूत करना जरूरी हो गया था। इसी उद्देश्य से अधिकृत शेयर पूंजी में वृद्धि का निर्णय लिया गया।
एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने अवैध रूप से लघु खनिजों के उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई को सख्त करने के लिए महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 की धारा 48(7) में संशोधन को मंजूरी दी।
संशोधित प्रावधानों के तहत लघु खनिजों (रेत, बजरी आदि) के अवैध खनन या परिवहन में शामिल लोगों पर देय रॉयल्टी की 10 गुना राशि के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि बढ़ा हुआ जुर्माना अवैध खनन और परिवहन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा।
चूंकि राज्य विधानसभा का सत्र वर्तमान में नहीं चल रहा है, ऐसे में मंत्रिमंडल ने इन बदलावों को तत्काल लागू करने के लिए भूमि राजस्व संहिता में संशोधन संबंधी अध्यादेश जारी करने को मंजूरी दी है। इससे अवैध खनन पर नियंत्रण के साथ-साथ राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने सरकार की महा एग्री-एआई नीति के अनुरूप कृत्रिम मेधा और कृषि प्रौद्योगिकी नवोन्मेष केंद्र के लिए प्रबंध निदेशक पद के सृजन को भी मंजूरी दी।
सरकार ने पहले ही महा एग्री-एआई नीति को मंजूरी देते हुए इसके क्रियान्वयन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस नीति के तहत राज्य स्तरीय कृत्रिम मेधा और कृषि प्रौद्योगिकी नवोन्मेष केंद्र की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में एआई और उन्नत प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
भाषा रमण अजय
अजय

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