एक अगस्त से शुरू हो रहे भारत-चीन सीमा व्यापार में पहले चरण में भारत से 20 व्यापारी जाएंगे
एक अगस्त से शुरू हो रहे भारत-चीन सीमा व्यापार में पहले चरण में भारत से 20 व्यापारी जाएंगे
पिथौरागढ़, 28 जुलाई (भाषा) लगभग छह वर्ष के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से एक अगस्त से फिर शुरू हो रहे एक भारत-चीन सीमा व्यापार के पहले चरण में तिब्बत स्थित चीनी प्रशासन ने केवल 20 भारतीय व्यापारियों को ही पुरांग (तकलाकोट) जाने की अनुमति दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, चीनी प्रशासन ने आवासीय सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है और भारतीय पक्ष से पहले दल के लिए 20 व्यापारियों के नाम मांगे हैं। इस चरण में व्यापारी बिना किसी व्यापारिक सामान के सीमा पार जाएंगे और तकलाकोट में व्यापारिक व्यवस्थाओं तथा अपने पूर्व में रखे सामान का जायजा लेंगे।
धारचूला के उपजिलाधिकारी एवं व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि पहले चरण के लिए सीमा व्यापार संगठन से 20 व्यापारियों का नाम देने को कहा गया है।
भारत-चीन सीमा व्यापार संघ ने निर्णय लिया है कि पहले दल में प्राथमिकता उन 20 व्यापारियों को दी जाएगी, जिनका माल 2019 में तकलाकोट के किराये के गोदामों में रह गया था। उस वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण सीमा व्यापार अचानक बंद कर दिया गया था।
संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकली ने कहा, ‘भारत से नया माल ले जाने से पहले हम तकलाकोट के गोदामों में रखे अपने उस पुराने और बिना बिके सामान का निरीक्षण करना चाहते हैं, जो 2019 में व्यापार अवधि समाप्त होने के कारण वहीं रह गया था।’
लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार वर्ष 1992 में पुनः शुरू किया गया था। इससे पहले 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था। यह व्यापार मुख्य रूप से पिथौरागढ़ जिले की व्यांस, दारमा और चौंदास घाटियों के सीमांत जनजातीय व्यापारियों द्वारा किया जाता है। 1962 से पहले पश्चिमी तिब्बत के साथ इन समुदायों का सदियों पुराना व्यापारिक संबंध था, जिसके बंद होने से उन्हें सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2019 में बंद हुआ यह व्यापार सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पुनः शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती जनजातीय समुदायों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि इस वर्ष सीमा व्यापार को पहले एक जून से शुरू किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन तिब्बती प्रशासन ने पुरांग व्यापारिक मंडी में आवास एवं दुकानों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा था। आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद अब एक अगस्त से इस ऐतिहासिक सीमा व्यापार के पुनः आरंभ होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
भाषा सं दीप्ति
. जितेंद्र अजय
अजय

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