चीनी निर्यात पर रोक: इस्मा की पहले से तय विदेशी सौदों को पूरा करने की अनुमति देने की मांग

चीनी निर्यात पर रोक: इस्मा की पहले से तय विदेशी सौदों को पूरा करने की अनुमति देने की मांग

चीनी निर्यात पर रोक: इस्मा की पहले से तय विदेशी सौदों को पूरा करने की अनुमति देने की मांग
Modified Date: May 14, 2026 / 07:54 pm IST
Published Date: May 14, 2026 7:54 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) चीनी उद्योग की संस्था इस्मा ने बृहस्पतिवार को सरकार से अपील की कि वह पहले से तय हो चुके निर्यात सौदों को पूरा करने की अनुमति दे। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक विदेशी चीनी निर्यात खेपों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) ने सरकार के इस कदम के पीछे के तर्क को मानते हुए कहा कि इस पाबंदी के अचानक लागू होने से उन मिलों के लिए व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं, जिन्होंने विदेशी खरीदारों के साथ पक्के सौदे कर लिए थे।

इस्मा के महानिदेशक दीपक बलानी ने बयान में कहा, ‘‘पहले से तय हो चुके सौदों को पूरा करने की अनुमति देने से व्यापार का निपटारा सही तरीके से करने में मदद मिल सकती है और वैश्विक बाजार में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की साख भी बनी रहेगी।’’

मौजूदा चीनी सत्र 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए, खाद्य मंत्रालय ने शुरू में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। बाद में, मंत्रालय ने 5,00,000 टन की एक और ‘खिड़की’ खोली, जिसमें से सिर्फ 87,587 टन चीनी के निर्यात को मंजूरी मिली।

अनौपचारिक रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 6,50,000 टन चीनी का निर्यात पहले ही हो चुका है, जबकि अनुमानित 40,000-60,000 टन चीनी अभी भी पहले से मंजूर सौदों के तहत पाइपलाइन में है।

इस्मा ने बताया कि चीनी निर्यात को मूल रूप से नवंबर, 2025 में उत्पादन के अच्छे अनुमानों के आधार पर मंजूरी दी गई थी।

लेकिन, गन्ने की खेती वाले मुख्य राज्यों—खासकर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश—में उम्मीद से कम पैदावार और खराब मौसम की वजह से उत्पादन अनुमान से कम रहा।

उत्पादन में कमी के बावजूद, इस्मा का कहना है कि मौजूदा सत्र कुल मिलाकर संतुलित ही रहेगा और सत्र के आखिर तक देश के पास चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद रहने की उम्मीद है।

साख निर्धारक एजेंसी इक्रा ने कहा कि निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक होने वाली तेजी को रोकने में मदद मिलेगी और साथ ही चीनी की उपलब्धता भी बनी रहेगी, क्योंकि सत्र के आखिर में चीनी का भंडार कम रहने का अनुमान है।

एथनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल को घटाने के बाद, भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन वर्ष 2025-26 में लगभग 2.8 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पहले लगाए गए अनुमानों से कम है। इक्रा के उपाध्यक्ष और क्षेत्र प्रमुख, रचित मेहता ने बताया कि घरेलू खपत 2.83 करोड़ टन और निर्यात पहले ही सात लाख टन हो जाने के बाद, सितंबर, 2026 तक पहले का बचा स्टॉक लगभग 43 लाख टन रहने का अनुमान है। यह लगभग दो महीने की खपत के बराबर है और पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम है।

वर्ष 2026-27 का परिदृश्य, चिंता की एक और वजह बन गया है। इस सत्र पर अल नीनो की स्थितियों का असर पड़ने की उम्मीद है, जिससे गन्ने के उत्पादन पर और दबाव पड़ सकता है और आपूर्ति कम रह सकती है।

इस्मा ने कहा कि वह सदस्य मिलों के साथ सलाह-मशविरा करके निर्यात आदेश के आगे के प्रभावों की जांच करना जारी रखे हुए है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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