बैंकों का ऋण एवं जमा अनुपात बढ़कर 82 प्रतिशत पर पहुंचाः एसबीआई रिपोर्ट

बैंकों का ऋण एवं जमा अनुपात बढ़कर 82 प्रतिशत पर पहुंचाः एसबीआई रिपोर्ट

बैंकों का ऋण एवं जमा अनुपात बढ़कर 82 प्रतिशत पर पहुंचाः एसबीआई रिपोर्ट
Modified Date: January 12, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: January 12, 2026 5:25 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) अर्थव्यवस्था के बढ़ते वित्तीयकरण के साथ देश का ऋण एवं जमा अनुपात लगातार बढ़ रहा है और यह वित्त वर्ष 2000-01 के 53 प्रतिशत से बढ़कर 15 दिसंबर, 2025 तक 82 प्रतिशत पर पहुंच गया। सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक शोध रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऋण एवं जमा (सीडी) अनुपात में यह सुधार बेहतर वित्तीय विकास को दर्शाता है और मजबूत आर्थिक वृद्धि का संकेत देता है।

रिपोर्ट कहती है कि वृद्धिशील सीडी अनुपात के आंकड़े कई बार 100 प्रतिशत से ऊपर चले गए हैं, जो जमा वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद ऋण की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं। बैंकों ने अन्य स्रोतों से संसाधन जुटाकर ऋण की इस मांग को पूरा किया।

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एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी के बाद भारतीय बैंकों के बहीखातों में मजबूत सुधार देखने को मिला है। बैंक परिसंपत्तियों की वृद्धि बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 77 प्रतिशत थी। यह ऋण मध्यस्थता और वित्तीय गहराई में बढ़ोतरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में जमा एवं ऋण में कई गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2004-05 से 2024-25 के दौरान जमा 18.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऋण 11.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

इस दौरान ऋण वृद्धि की रफ्तार अधिक रही, जिसके चलते ऋण एवं जमा अनुपात वित्त वर्ष 2020-21 के 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 79 प्रतिशत हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की बाजार हिस्सेदारी में अब धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है, जो बहीखाते में सुधार और नए ऋण देने की क्षमता को दर्शाता है।

वहीं, चालू और बचत खाते का कुल अनुपात करीब 37 प्रतिशत पर स्थिर रहा, हालांकि निजी बैंकों ने इस खंड में अपनी हिस्सेदारी मजबूत की, जबकि विदेशी बैंकों में इसमें गिरावट आई।

एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि असुरक्षित ऋण 2004-05 के दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 46.9 लाख करोड़ रुपये हो गया और कुल ऋण में इसकी हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत से बढ़कर 24.5 प्रतिशत हो गई है।

रोजगार के मोर्चे पर, बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या दो दशकों में लगभग दोगुनी होकर 8.6 लाख से बढ़कर 18.1 लाख हो गई है। इसमें निजी बैंकों की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत जबकि सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत है।

वहीं बैंक अधिकारियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई है, जो बैंकिंग क्षेत्र में कौशल-आधारित भूमिकाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों की कुल परिसंपत्तियां वित्त वर्ष 2004-05 के 23.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 312.2 लाख करोड़ रुपये हो गईं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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