विदेशी मुद्रा जमा और बढ़ाने को प्रवासी भारतीयों को जोड़ने के लिए कदम उठाएं बैंक: सीतारमण

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विदेशी मुद्रा जमा और बढ़ाने को प्रवासी भारतीयों को जोड़ने के लिए कदम उठाएं बैंक: सीतारमण

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 06:41 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 06:41 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकों से कहा कि वे विदेशी मुद्रा जमा को और बढ़ाने के लिए प्रवासी भारतीयों को जोड़ने के लिए कदम उठायें।

सीतारमण ने विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा (एफसीएनआर-बी), बाह्य वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा कर्ज अदला बदली उपायों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शुरुआती उत्साहजनक प्रतिक्रिया की सराहना की।

वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, उन्होंने बैंकों से एनआरआई समुदाय तक अपनी पहुंच और बढ़ाने, नए तरह के जमा उत्पाद पेश करने और योजनाओं की बची हुई अवधि के दौरान जमा जुटाने की गति को बनाए रखने का आह्वान किया।

बैठक के दौरान, मुख्य कार्यपालक अधिकारियों ने बताया कि बैंक एफसीएनआर (बी) जमा पर आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं, जिसमें पांच साल की जमा राशि भी शामिल है। यह नई एफसीएनआरबी (बी) जमा राशि पर ब्याज दर की सीमा को हटाने के कारण संभव हुआ है।

बैंकों के सीईओ ने बताया कि सिंगापुर, हांगकांग, पश्चिम एशिया, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य विदेशी क्षेत्रों में रहने वाले एनआरआई ने इसमें काफी रुचि दिखाई है।

बयान में कहा गया है कि उन्होंने सकारात्मक माहौल का फायदा उठाने और योजना की बची हुई अवधि के दौरान जमा जुटाने की प्रक्रिया को तेज करने की अपनी योजनाओं के बारे में बताया।

बयान के अनुसार, उन्होंने भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) के दौरान बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी विदेशों से कर्ज जुटाने की प्रक्रिया में और तेजी आएगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने यह भी बताया कि उन्होंने एनआरआई समुदाय से जुड़ने और जमा राशि तेजी से बढ़ाने के लिए डिजिटल चैनल सहित खास तौर पर तैयार की गई रणनीतियां अपनाई हैं।

उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा दिए जा रहे आकर्षक रिटर्न के कारण एफसीएनआर (बी) जमा राशि जुटाने में स्पष्ट रूप से तेजी देखी गई है।

बातचीत के दौरान बैंकों ने यह भी बताया कि गुजरात की गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में मौजूद अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग इकाइयों का उपयोग ब्रिटेन, अमेरिका, पश्चिम एशिया, हांगकांग, सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई क्षेत्रों से कोष जुटाने के लिए किया जा रहा है।

सीतारमण ने बैंकों से गिफ्ट सिटी में उपलब्ध वित्तीय सेवाओं और संस्थागत बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का भी आग्रह किया।

चर्चा के दौरान, आरबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय बैंक जमा राशि जुटाने और पात्र इकाइयों को उधार की सुविधा देने में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है।

इस बैठक में वित्त मंत्रालय के सचिवों समेत कई वरिष्ठ अधिकारी अधिकारी भी शामिल हुए।

बयान के अनुसार, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों की लगातार और बड़े पैमाने पर भागीदारी यह दिखाती है कि विदेशी मुद्रा लाने, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाह्य क्षेत्र को मजबूत बनाने में अदला-बदली सुविधाएं कितनी प्रभावी हैं।

भाषा रमण अजय

अजय