नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में करीब दो वर्ष पूर्व एक कोचिंग सेंटर के अवैध तलघर में तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की डूबने से हुई मौत के मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के तीन अभियंताओं की लापरवाही को उजागर किया है।
सीबीआई ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट की अदालत में दाखिल अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह जानकारी दी। अदालत ने इस वर्ष 12 मार्च को सीबीआई को कर्तव्य में संभावित लापरवाही और भ्रष्ट आचरण के संबंध में एमसीडी अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था।
आठ जुलाई की इस पूरक रिपोर्ट में अदालत से आगे की कार्रवाई बंद करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, इसमें एमसीडी के करोल बाग क्षेत्र के तत्कालीन उपायुक्त कुमार अभिषेक और पूर्व अधीक्षण अभियंता अजय नागपाल को क्लीन चिट दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच में करोल बाग क्षेत्र के भवन विभाग के तीन अधिकारियों तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता (जेई) अर्णव दत्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता (एई) राजीव कुमार जैन और तत्कालीन अधिशासी अभियंता (ईई) कुमार महेंद्र की कर्तव्य में लापरवाही और ढिलाई को उजागर किया गया है।
पूरक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन जेई अर्णव दत्ता ने सितंबर 2023 में निरीक्षण के दौरान झूठी रिपोर्ट दी कि तलघर का उपयोग फर्नीचर रखने के लिए हो रहा है, जबकि उन्हें पता था कि वहां परीक्षा हॉल संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि निरीक्षण के दौरान ली गई तस्वीरों में संस्थान के साइनबोर्ड पर लिखे ‘एग्जाम हॉल’ शब्दों को हटाया या छिपाया गया था।
सीबीआई का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि दत्ता को वास्तविक उपयोग की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर गलत तथ्य दर्ज किए।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सहायक अभियंता राजीव कुमार जैन ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती। कई सुनवाइयों में शामिल होने और भवन के रिकॉर्ड तक पहुंच होने के बावजूद उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को तलघर के दुरुपयोग की जानकारी नहीं दी। उनसे प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच, परिसर के वास्तविक उपयोग का सत्यापन और किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट करने की अपेक्षा थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
सीबीआई ने अधिशासी अभियंता कुमार महेंद्र पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट था कि पट्टा विलेख में तलघर का उपयोग कोचिंग गतिविधियों के लिए दर्शाया गया था, जबकि स्वीकृत योजना में इसकी अनुमति केवल घरेलू भंडारण और पार्किंग के लिए थी। इसके बावजूद उन्होंने इस दुरुपयोग को नहीं पहचाना।
इससे पहले मृतक अभ्यर्थी नेविन दलविन के पिता दलविन सुरेश की ओर से अधिवक्ता अभिजीत आनंद ने विरोध याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सीबीआई ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं की। इसके बाद अदालत ने मामले में आगे की जांच का आदेश दिया था।
दिल्ली में 27 जुलाई 2024 को ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के तलघर में भरे पानी में डूबने से तीन सिविल सेवा परीक्षा अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो अगस्त, 2024 को मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए आपराधिक लापरवाही, कर्तव्य में ढिलाई और संभावित भ्रष्ट आचरण सहित सभी पहलुओं की व्यापक जांच के निर्देश दिए थे।
भाषा खारी वैभव
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