नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स देशों ने शनिवार को सीमा पार धोखाधड़ी अभियानों और तथाकथित स्कैम कंपाउंड (साइबर ठगी के अड्डे) सहित संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क के बढ़ने पर गंभीर चिंता जताई। समूह ने इन नेटवर्क को ध्वस्त करने और अवैध धन का पता लगाने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का संकल्प लिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ में सदस्य देशों ने डिजिटल प्रौद्योगिकियों, भुगतान प्रणालियों और उभरते वित्तीय माध्यमों के दुरुपयोग से बड़े पैमाने पर की जा रही धोखाधड़ी और संवेदनशील तथा कमजोर लोगों को शिकार बनाए जाने के बढ़ते खतरे को रेखांकित किया।
शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में कहा गया, ”हम संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क के प्रसार पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जिसमें सीमा पार धोखाधड़ी अभियान और तथाकथित ‘स्कैम कंपाउंड’ शामिल हैं, जो डिजिटल प्रौद्योगिकियों, भुगतान प्रणालियों और कमजोर परिस्थितियों में फंसे लोगों का फायदा उठाते हैं।”
घोषणापत्र में आपराधिक बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने, अपराध से अर्जित धन की वसूली, पीड़ितों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट द्वारा वित्तीय संस्थानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया।
घोषणापत्र में कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने माना कि वर्चुअल संपत्तियों (क्रिप्टो आदि) के अवैध उपयोग और घरेलू नियामकीय ढांचों के उल्लंघन सहित ये गतिविधियां आर्थिक स्थिरता, टिकाऊ वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
इन खतरों से निपटने के लिए समूह ने स्थापित ब्रिक्स कार्य समूहों का उपयोग करते हुए सीमा शुल्क अधिकारियों, वित्तीय खुफिया इकाइयों (एफआईयू), कानून प्रवर्तन एजेंसियों, कर अधिकारियों और नियामक निकायों के बीच सीमा पार खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।
भाषा पाण्डेय अजय
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