नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स देशों के नेताओं ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की प्रभावी और पूरी तरह कार्यरत दो-स्तरीय, बाध्यकारी विवाद निपटान व्यवस्था को तत्काल बहाल करने की शनिवार को पुरजोर मांग की।
ब्रिक्स नेताओं द्वारा अपनाए गए नयी दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों ने कहा कि वे जरूरी सुधारों के जरिये डब्ल्यूटीओ को मजबूत करने, संगठन के ढांचे के भीतर बातचीत की प्रक्रिया को सुगम बनाने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में फिर से विश्वसनीयता कायम करने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
घोषणापत्र में कहा गया, “हम सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के लिए विश्वास और पूर्वानुमेयता की नींव के रूप में सुलभ, प्रभावी, पूरी तरह कार्यरत और दो-स्तरीय बाध्यकारी डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान व्यवस्था को तत्काल बहाल करने तथा अपीलीय निकाय के नए सदस्यों की बिना किसी और देरी के नियुक्ति की पुरजोर वकालत करते हैं।”
ब्रिक्स देशों ने 166 सदस्य देशों वाले डब्ल्यूटीओ में सुधार और गैर-भेदभावपूर्ण, खुले, न्यायसंगत, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी, पूर्वानुमेय तथा नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने का समर्थन किया तथा कहा कि वे बहुपक्षीय वार्ताओं में सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।
घोषणापत्र में कहा गया कि सदस्य देश जिनेवा में होने वाली बहुपक्षीय वार्ताओं में, विशेष रूप से डब्ल्यूटीओ सुधार से जुड़े मुद्दों पर भाग लेते रहेंगे।
जिनेवा में मुख्यालय वाला डब्ल्यूटीओ वैश्विक निर्यात-आयात की निगरानी के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच व्यापार विवादों का निपटारा भी करता है। भारत 1995 से डब्ल्यूटीओ का सदस्य है।
विवाद निपटान संस्था (डीएसबी) डब्ल्यूटीओ की महत्वपूर्ण इकाइयों में से एक है। किसी सदस्य देश की शिकायत के बाद विवाद सुलझाने के दो प्रमुख रास्ते हैं। पहला ये कि दोनों देश द्विपक्षीय बातचीत और परामर्श के जरिए आपसी सहमति से समाधान निकालें। दूसरा, विवाद का न्यायिक निपटारा हो, जिसमें एक पैनल फैसला देता है और उससे असंतुष्ट पक्ष अपीलीय निकाय में उस फैसले को चुनौती दे सकता है। अपीलीय निकाय विवादों के निपटारे की सर्वोच्च संस्था है।
भाषा यासिर पाण्डेय
पाण्डेय