ब्रिक्स नेताओं ने कार्बन कर व्यवस्था जैसे ‘एकतरफा और भेदभावपूर्ण’ उपायों का विरोध किया

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ब्रिक्स नेताओं ने कार्बन कर व्यवस्था जैसे 'एकतरफा और भेदभावपूर्ण' उपायों का विरोध किया

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 08:18 PM IST

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स देशों के नेताओं ने शनिवार को ‘कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था’ (सीबीएएम) जैसे एकतरफा, दंडात्मक और भेदभावपूर्ण उपायों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कदम विकासशील देशों के जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को कमजोर करते हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जारी ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं होने वाले एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपाय विकासशील देशों के जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने तथा अनुकूलन क्षमता और मजबूती बढ़ाने के प्रयासों को प्रभावित करते हैं।

सीबीएएम के तहत अधिक कार्बन उत्सर्जन वाली वस्तुओं के आयात पर उनके उत्पादन के दौरान हुए उत्सर्जन के आधार पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन इस तरह का कार्बन कर लगाने की योजना घोषित कर चुके हैं। इससे लोहा-इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

घोषणापत्र में बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा कार्यालयों के बीच जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण, बौद्धिक संपदा के वाणिज्यिक इस्तेमाल, पेटेंट जांच, पारंपरिक ज्ञान, मूल स्थान के नाम, भौगोलिक संकेतक (जीआई) और कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।

ब्रिक्स नेताओं ने डिजिटल क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकारों का पालन सुनिश्चित करने, एआई के प्रशिक्षण में इनके इस्तेमाल और अधिकार धारकों को उचित पारिश्रमिक देने के लिए सहयोग के महत्व को स्वीकार किया। साथ ही, विकासशील देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं का ध्यान रखने की बात कही।

घोषणापत्र में कहा गया कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐसे ज्ञान, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के गलत इस्तेमाल और गलत प्रस्तुतीकरण का जोखिम है, जिनका डेटा सेट और एआई मॉडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

ब्रिक्स नेताओं ने वैश्विक मूल्य शृंखलाओं को मजबूत, कुशल, भरोसेमंद, पारदर्शी, सुरक्षित, निष्पक्ष, स्थिर और समावेशी बनाने के लिए सहयोग का महत्व दोहराया। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए नीतिगत उपायों की संभावनाएं तलाशने की इच्छा जताई।

उन्होंने वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए कारोबारी सुगमता, क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, औद्योगिक क्षमता, संपर्क सुविधा, बौद्धिक संपदा संरक्षण और सुरक्षित एवं सस्ती प्रौद्योगिकी तक पहुंच के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

ब्रिक्स देशों ने वैश्विक मूल्य शृंखलाओं पर साझा समझ की कार्ययोजना लागू करने का समर्थन किया और 2026-30 के लिए ब्रिक्स वैश्विक मूल्य शृंखला कार्ययोजना को आगे बढ़ाने का स्वागत किया।

घोषणापत्र में सदस्य देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) की क्षमता का इस्तेमाल व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, नवोन्मेषण और टिकाऊ वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए करने की बात कही गई।

नेताओं ने व्यापार दस्तावेजों को डिजिटल करने समेत संपर्क और कारोबारी सुगमता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि कारोबार से जुड़े पक्ष अधिक कुशल और पारदर्शी तरीके से काम कर सकें।

ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि सदस्य देशों के समाज और सभ्यताओं में व्यापक विविधता है और वे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं होने वाले अनुचित एकतरफा संरक्षणवादी उपायों से अलग-अलग ढंग से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को परस्पर लाभ वाले सतत विकास के लिए न्यायसंगत, निष्पक्ष, स्थिर और भरोसेमंद माहौल को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने विकासशील देशों और उभरते बाजारों की वैश्विक विनिर्माण एवं उत्पादन में अधिक मूल्यवर्धित क्षेत्रों में व्यापक और समान भागीदारी के लिए काम करने पर भी सहमति जताई। इसके लिए व्यापार एवं निवेश पहल, तकनीकी सहयोग, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और संबंधित देशों के कानूनों, नियमों एवं नीतियों के अनुरूप प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने की बात कही गई।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय