घरेलू टीबीएम को बजट में प्रोत्साहन से घट सकती है बुलेट ट्रेन परियोजना की देरी: विशेषज्ञ

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घरेलू टीबीएम को बजट में प्रोत्साहन से घट सकती है बुलेट ट्रेन परियोजना की देरी: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 04:31 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 04:31 PM IST

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए चीन से टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) के आयात में हो रही देरी के बीच, उच्च श्रेणी के निर्माण उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले से भारत की तेज रफ्तार वाली रेल आकांक्षाओं को बल मिल सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में उच्च मूल्य और तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण और बुनियादी ढांचा उपकरण (सीआईई) संवर्धन योजना का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा, ”यह बहुमंजिला अपार्टमेंट में लिफ्ट, छोटे और बड़े अग्निशमन उपकरणों से लेकर मेट्रो और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क बनाने के लिए टनल बोरिंग उपकरणों तक हो सकता है।”

भारत के पहले बुलेट ट्रेन गलियारे मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल (एमएएचएसआर) परियोजना के तहत बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शीलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने के लिए कुछ सबसे बड़ी टीबीएम की आवश्यकता है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे सात किलोमीटर तक समुद्र के नीचे का हिस्सा भी शामिल है।

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जर्मनी में बने टीबीएम को पिछले साल सितंबर में चीन से मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट भेजा जाना था। उन्होंने बताया कि केवल एक खेप पहुंची है और बाकी को तकनीकी कारणों से कुछ और महीनों के लिए रोक दिया गया है, जिससे समुद्र के नीचे सुरंग की खुदाई शुरू करने में देरी हो रही है।

ऐसे में उद्योग विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रस्तावित सीआईई योजना धीरे-धीरे ऐसी कमजोरियों को कम कर सकती है।

एक बुनियादी ढांचा विश्लेषक ने कहा, ”भारत इस समय विशेष टीबीएम और अन्य उन्नत निर्माण मशीनरी के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।” उन्होंने कहा कि कोलकाता मेट्रो के लिए नदी के नीचे की सुरंग बनाने का काम और आगामी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सबसे बड़ी रेल सुरंग जैसी भारत की ऐतिहासिक परियोजनाओं का निर्माण आयातित टीबीएम की मदद से किया गया था।

उन्होंने कहा, ”एक विशेष प्रोत्साहन योजना घरेलू क्षमता को उत्प्रेरित कर सकती है, लागत कम कर सकती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े परियोजना जोखिमों को कम कर सकती है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो सीआईई योजना बड़े व्यास वाली टीबीएम, सटीक पुर्जों और कटर हेड के लिए एक स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद कर सकती है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय