नागपुर हवाई अड्डे के उन्नयन, आधुनिकीकरण को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

नागपुर हवाई अड्डे के उन्नयन, आधुनिकीकरण को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

नागपुर हवाई अड्डे के उन्नयन, आधुनिकीकरण को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
Modified Date: May 13, 2026 / 04:43 pm IST
Published Date: May 13, 2026 4:43 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन और आधुनिकीकरण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव में मत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि इस परियोजना के तहत नागपुर हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जाएगा।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, सरकार ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की उस जमीन की पट्टा अवधि को छह अगस्त, 2039 के बाद भी बढ़ाने को मंजूरी दी है, जो एमआईएचएएन इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) को आवंटित की गई थी।

इस फैसले से एमआईएल को हवाई अड्डे के संचालन के लिए जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) को लाइसेंस देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले के साथ पट्टे की मियाद अब जीएनआईएएल की 30 साल की रियायती अवधि के साथ ही खत्म होगी।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस कदम से नागपुर हवाई अड्डे के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी के संयोजन से इस हवाई अड्डे पर निवेश, आधुनिकीकरण और यात्री एवं मालवहन सेवाओं में सुधार होगा।’’

वर्ष 2009 में एएआई और महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) ने 49:51 इक्विटी संरचना के साथ एक संयुक्त उद्यम एमआईएल का गठन किया था। हालांकि, भूमि सीमांकन से जुड़े मुद्दों के कारण पट्टा देने में देरी हुई और एएआई की जमीन छह अगस्त, 2039 तक के लिए एमआईएल को पट्टे पर दे दी गई।

इसके बाद 2016 में एमआईएल ने पीपीपी मॉडल के तहत हवाई अड्डे के संचालन के लिए साझेदार चयन को वैश्विक निविदा जारी की, जिसमें जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) 5.76 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी के साथ सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी। बाद में इसे संशोधित कर 14.49 प्रतिशत किया गया, लेकिन मार्च, 2020 में निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी गई।

जीएएल ने इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जहां उसके पक्ष में फैसला आया। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने भी 27 सितंबर, 2024 को जीएएल के पक्ष में निर्णय दिया। इसके अनुरूप, एमआईएल ने आठ अक्टूबर, 2024 को जीएनआईएएल के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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